जब भक्त बुलाते हैं हरि दौड़ के आते हैं

जब भक्त बुलाते हैं हरि दौड़ के आते हैं

“जब भक्त बुलाते हैं हरि दौड़ के आते हैं” यह वाक्य केवल शब्द नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच के प्रेम का जीवंत प्रमाण है। यह बताता है कि ईश्वर कहीं दूर नहीं हैं — वे तो हमारे हर भाव, हर पुकार, हर अश्रु में बसते हैं। जब हृदय सच्ची भक्ति से पुकारता है, तो भगवान स्वयं उस पुकार का उत्तर देने आते हैं। इस भाव में अपार विश्वास और आत्म surrender छिपा है — जो यह सिखाता है कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों के साथ हैं, बस उन्हें सच्चे मन से बुलाने की देर है।

rajeshswari

जब भक्त बुलाते हैँ

जब भक्त बुलाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ ॥
वो तो दीन और दुःखीओं को ॥
आ के गले लगाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,
जब भक्त बुलाते हैँ…

द्रोपदी ने जब, उन्हें पुकारा, दौड़े दौड़े आ गए ।
भरी सभा में, चीर बढ़ा के, उसकी लाज बचा गए ॥
वो बहुत दयालु हैँ, वो दया के सागर हैँ,
वो चीर बढ़ाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,
जब भक्त बुलाते हैँ…

अर्जुन ने जब, उन्हें पुकारा, सार्थी बनके आ गए ।
गीता का, उपदेश सुना के, उसका भरम मिटा गए ॥
वो ज्ञान सिखाते हैँ, वो भरम मिटाते हैँ,
वो गले लगाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,
जब भक्त बुलाते हैँ…

धन्ने ने जब, उन्हें पुकारा, ठाकुर बनके आ गए ।
पत्थरों में, दर्श दिखा के, प्रेम का भोग लगा गए ॥
वो दर्श दिखाते हैँ, वो हल चलाते हैँ,
वो मान बढ़ाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,
जब भक्त बुलाते हैँ…

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मित्र सुद्दामा, द्वारे आए, दौड़े दौड़े आ गए ।
दो मुठी, सत्तू के बदले, उसका महल बना गए ॥
वो फ़र्ज़ निभाते हैँ, वो गले लगाते हैँ,
वो महल बनाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ,
जब भक्त बुलाते हैँ…

प्रभु को सच्चे भाव से पुकारने की विधि

  1. समय: ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4–6 बजे) या सायंकाल आरती के समय।
  2. स्थान: घर के पूजास्थल या किसी पवित्र स्थान पर शांत मन से बैठें।
  3. सामग्री: दीपक, पुष्प, धूप, जल, और तुलसीपत्र।
  4. पूजन क्रम:
    • दीपक जलाकर भगवान विष्णु, श्रीराम या श्रीकृष्ण का स्मरण करें।
    • दोनों हाथ जोड़कर कहें — “हे हरि, मेरे मन के सागर में उतर आओ, मैं आपको सच्चे मन से बुला रहा हूँ।”
    • “हरे राम हरे कृष्ण” या “श्रीराम जय राम जय जय राम” मंत्र का जप करें।
    • अंत में आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।
  5. भाव: मन को पूर्णतः भक्तिभाव में डुबो दें, मानो हर पुकार प्रभु के हृदय तक पहुँच रही हो।

सच्ची भक्ति से प्राप्त होने वाले शुभ फल

  • मन में विश्वास और आत्मिक शक्ति का संचार होता है।
  • निराशा और भय दूर होकर जीवन में आशा का प्रकाश आता है।
  • कठिन समय में मार्गदर्शन और सहारा मिलता है।
  • भक्ति और आध्यात्मिक जागृति का अनुभव होता है।
  • ईश्वर की उपस्थिति का जीवंत एहसास होने लगता है, जिससे जीवन अर्थपूर्ण बनता है।

निष्कर्ष

“जब भक्त बुलाते हैं हरि दौड़ के आते हैं” यह भाव हमें यह सिखाता है कि ईश्वर किसी मंदिर या आकाश में नहीं, बल्कि हमारे हृदय में निवास करते हैं। जब हम सच्चे मन से उन्हें पुकारते हैं, तो वे हर रूप में, हर मार्ग से हमारी सहायता करने पहुँच जाते हैं। प्रभु को पाने के लिए कोई कठिन साधना नहीं, केवल सच्ची आस्था और निर्मल मन चाहिए।

Shiv murti

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