तुझे तेरे राम बुलाते हैं | प्रेम, आस्था और आत्मसमर्पण की दिव्य पुकार

तुझे तेरे राम बुलाते हैं | प्रेम, आस्था और आत्मसमर्पण की दिव्य पुकार

“तुझे तेरे राम बुलाते हैं” — यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक दिव्य आह्वान है जो हर उस आत्मा को पुकारता है जो संसार में भटक रही है। यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि जब जीवन की राहें कठिन लगती हैं, जब मन भटकता है, तब प्रभु श्रीराम अपने प्रेम से हमें अपने चरणों की ओर बुलाते हैं। यह पुकार हमें संसार के मोह से निकालकर शांति, श्रद्धा और सच्चे सुख की ओर ले जाती है। श्रीराम का नाम लेने से मन को वह स्थिरता मिलती है जो किसी और साधन से नहीं मिल सकती।

rajeshswari

आ लौट के आ,
आ लौट के आजा हनुमान तुझे तेरे राम बुलाते है,
संकट में लखन के प्राण, तुझे तेरे राम बुलाते है…….

जो पुछेगी मैया सुन मेरे भैया कहाँ है लखन क्या कहूँगा,
तन मन है लखन मेरा जीवन लखन बिन इसके मैं कैसे रहूँगा,
लक्ष्मण में बसे मेरे प्राण तुझे तेरे राम बुलाते है…….

बीते ज्यों रैना बरसे है नैना रह-रह के मन घबराए,
राह निहारूँ तुझको पुकारूँ कब तू संजीवन लाये,
रख लेना तू मेरा मान तुझे तेरे राम बुलाते है…..

पवन वेग से बड़े तेज से हनुमत बूंटी लाये,
लखन लाल के प्राण बचाकर राम के काम बनाये,
सब करे तेरा गुणगान राम जी गले लगाते है,
संकट मौचन हनुमान जो सबके कष्ट मिटाते है,
जो धरता है इन का ध्यान वो हर पल मौज मनाते है,
लो आ गए हनुमान राम जी गले लगाते हैं…….

भाव से पूजा या स्मरण विधि

  1. दिन और समय: किसी भी दिन प्रातःकाल या संध्या समय शांति से करें।
  2. स्थान: घर के मंदिर में या किसी शांत स्थान पर श्रीराम जी का चित्र रखें।
  3. सामग्री: तुलसी पत्ता, दीपक, पुष्प, और भगवान का नामजप माला रखें।
  4. प्रारंभ: तीन बार “जय श्रीराम” का उच्चारण करें और दीपक जलाएँ।
  5. जप या भजन: श्रद्धा से “तुझे तेरे राम बुलाते हैं” भाव में भजन या मंत्र का जप करें।
  6. भावना रखें: मन में यह अनुभव करें कि श्रीराम स्वयं आपको अपनी ओर खींच रहे हैं, और उनके चरणों में हर चिंता मिट रही है।
  7. समापन: अंत में प्रार्थना करें — “हे प्रभु श्रीराम, जब-जब मैं भटकूँ, आपकी यह दिव्य पुकार मुझे आपके चरणों तक पहुँचा दे।”
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इस भक्ति से मिलने वाले लाभ

  • मन की शांति: ईश्वर की याद से तनाव और अस्थिरता दूर होती है।
  • आत्मिक जागृति: भीतर विश्वास और प्रेम का संचार होता है।
  • भक्ति में प्रगाढ़ता: श्रीराम के प्रति निष्ठा और समर्पण की भावना बढ़ती है।
  • संकटों से मुक्ति: प्रभु के नाम से हर भय और दुख मिट जाते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा: मन में सुकून और घर में शुभता का वातावरण बनता है।

निष्कर्ष

“तुझे तेरे राम बुलाते हैं” — यह पंक्ति हमें भीतर तक छू जाती है, क्योंकि यह केवल आवाज़ नहीं, बल्कि प्रेम का निमंत्रण है। श्रीराम हमें अपने समीप बुलाकर न केवल हमारे दुख हरते हैं, बल्कि हमें सच्चे मार्ग की ओर भी ले जाते हैं। जब भक्त इस पुकार को सुनकर अपने जीवन में भक्ति और सेवा का मार्ग अपनाता है, तो उसका हर अंधकार मिट जाता है। प्रभु की यह पुकार आत्मा के लिए वह दीपक है, जो सदा मार्ग दिखाता है।

Shiv murti

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