टीईटी अनिवार्यता पर शिक्षकों में आक्रोश
“आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को मिलनी चाहिए छूट”
वाराणसी (जनवार्ता)। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ नेता सनत कुमार सिंह ने केन्द्र सरकार की शिक्षक नीतियों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने #NoTetBeforeRteAct अभियान के तहत शिक्षकों की प्रमुख माँग को दोहराते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाने का फैसला पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

श्री सिंह ने बताया कि टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ॰ दिनेश चन्द्र शर्मा के मार्गदर्शन में कुछ महीने पहले देश भर के शिक्षक प्रतिनिधियों ने सभी माननीय सांसदों को ज्ञापन सौंपकर माँग की थी कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूरी तरह छूट दी जाए।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि केन्द्रीय शिक्षा (राज्य) मंत्री शिक्षकों से बातचीत के दौरान एक बात कहते हैं, लेकिन संसद में ठीक उलट बयान देते हैं। श्री सिंह ने तीखा सवाल उठाया— “सभी राज्यों से माँगी गई सूचनाओं और आँकड़ों को क्या झूठ समझ लिया गया? अगर सरकार वाकई शिक्षकों के साथ है, तो संसद में दिए गए उत्तर में उन आँकड़ों का जिक्र क्यों नहीं आया? ऐसा प्रतीत होता है कि शिक्षा मंत्रालय ने ठान लिया है कि शिक्षकों को कभी चैन से नहीं बैठने देगा।”
उन्होंने कहा कि देश भर में करीब बीस लाख शिक्षक पहले से निर्धारित योग्यता पूरी करके सेवा में आए हैं। उन्हें बीस-पच्चीस वर्ष बाद फिर से परीक्षा देने के लिए मजबूर करना कितना न्यायसंगत है? उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा— “बीस साल पहले पुलिस, सेना या अर्धसैनिक बलों में भर्ती हुए लोगों को आज दस किलोमीटर दौड़ लगाने को कहा जाए तो पूरा विभाग खाली हो जाएगा। कितने न्यायाधीश आज सीएलएटी परीक्षा देने को तैयार होंगे? पचास-पचपन वर्ष के शिक्षकों को परीक्षा में बैठने के लिए बाध्य करना क्रूरता के सिवा कुछ नहीं है।”
श्री सिंह ने संसद का हवाला देते हुए कहा कि पिछले सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसदों ने सभी राज्यों से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। फिर भी केन्द्र सरकार का रवैया पूरी तरह निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि जनता सांसद इसलिए चुनती है ताकि वे संसद में जनहित की रक्षा करें, न कि ऐसे फैसले लें जो लाखों परिवारों की जिंदगी को प्रभावित करें।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि सरकार की मौजूदा नीतियाँ शिक्षकों को बड़े पैमाने पर आन्दोलन करने के लिए मजबूर कर रही हैं, जो किसी भी हाल में उचित नहीं है। शिक्षक संगठन अब और मजबूत तथा सशक्त कदम उठाने की तैयारी में हैं ताकि आरटीई एक्ट से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी को कभी अनिवार्य न किया जाए।

