वरिष्ठ नाटककार और रंगकर्मी नाट्यश्री मोतीलाल गुप्ता का निधन
वाराणसी (जनवार्ता)। शहर के जाने-माने वरिष्ठ नाटककार, निर्देशक, रंगकर्मी तथा गोकुल आर्ट्स के संस्थापक सदस्य श्री मोतीलाल गुप्ता का गुरुवार देर रात निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को मणिकर्णिका घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। गोकुल आर्ट्स के अध्यक्ष डॉ. शिव सुंदर गांगुली की उपस्थिति में उनके भतीजे उत्तम गुप्ता ने अंतिम संस्कार किया।


श्री गुप्ता ने रंगमंच के क्षेत्र में दशकों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया। गोकुल आर्ट्स में कार्यक्रम अधिशासी के रूप में उन्होंने २७ वर्षों तक अखिल भारतीय हिंदी लघु नाटक प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया। वे प्रसिद्ध नाट्य संस्था प्रेरणा कला मंच के नाट्य प्रशिक्षक, नाट्यकार तथा निर्देशक भी रहे। मुंशी प्रेमचंद की दर्जनों कहानियों को नाट्य रूप में ढालकर उनका मंचन करवाया, जिससे हिंदी साहित्य और रंगमंच के बीच मजबूत सेतु बना।

उनकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि २००९ में नाट्य अनुष्ठान के तहत नागरी नाटक मंडली में ११ कलाकारों के साथ ३७ नाटकों का ३४ घंटे का नॉन-स्टॉप मंचन था, जिसने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त किया।
श्री गुप्ता ने नुक्कड़ नाटक के लिए एक नई शैली ‘एवरग्रीन शैली’ का आविष्कार किया, जिसमें मंच या सड़क पर प्रस्तुति हो, दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। नाटक के प्रति उनका जुनून असाधारण था। उन्होंने अनेक युवा कलाकारों को प्रशिक्षित कर रंगमंच से जोड़ा और वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया।
उनके निधन से वाराणसी के रंगमंच, साहित्य और सांस्कृतिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है। कई कलाकारों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर फादर आनंद, राजेश श्रीवास्तव, रणजीत यादव, अजय रोशन, अजय थापा, विवेक गुप्ता, नवीन चंद्रा, संजय वर्मा, असलम शेख, राज शेखर गांगुली, हरिश्चंद्र पाल, भोला सिंह राठौड़, फादर दयाकर, धनरतन यादव, संजय श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
डॉ. शिव सुंदर गांगुली, अध्यक्ष, गोकुल आर्ट्स ने कहा कि श्री गुप्ता का योगदान रंगकर्मी समुदाय सदैव याद रखेगा।

