धर्म और सत्ता की निर्णायक परीक्षा: गोहत्या बंदी की मांग पर शंकराचार्य की सरकार को चेतावनी

धर्म और सत्ता की निर्णायक परीक्षा: गोहत्या बंदी की मांग पर शंकराचार्य की सरकार को चेतावनी

वाराणसी,  (जनवार्ता)। स्वतंत्र भारत में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बंदी कानून की मांग को लेकर एक बार फिर संत समाज और सत्ता के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। श्रीविद्यामठ, केदारघाट में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में परमाराध्य शंकराचार्य जी की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर तीखा बयान जारी किया गया।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि गोमाता की रक्षा की आवाज उठाने वालों के साथ इतिहास में बार-बार दमन हुआ है। वक्ताओं ने 1966 के दिल्ली गोरक्षा आंदोलन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस समय कई संतों और गोभक्तों को गोलियों का सामना करना पड़ा था। इसी क्रम में अब वर्तमान समय में भी गोहत्या बंदी की मांग करने वालों पर कथित रूप से अत्याचार किए जा रहे हैं।
शंकराचार्य पद की प्रमाणिकता पर सवाल को बताया अपमानजनक
प्रेस विज्ञप्ति में शासन द्वारा शंकराचार्य पद की प्रमाणिकता मांगे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि धर्म किसी प्रमाणपत्र का मोहताज नहीं होता। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि मांगा गया प्रमाण शासन को सौंप दिया गया है।
इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला करते हुए कहा गया कि अब सत्ता को अपने ‘हिंदू होने’ का प्रमाण देना होगा। वक्ताओं के अनुसार, हिंदू होने की कसौटी केवल भाषणों और प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि गो-सेवा और धर्म-रक्षा से तय होती है।
दो प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं
प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष दो मुख्य मांगें रखी गईं—
गोमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा
वक्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा देशी गायों को ‘राज्यमाता’ घोषित करने और नेपाल में गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ का दर्जा दिए जाने का उदाहरण देते हुए उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही निर्णय लेने की मांग की।
मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध
उत्तर प्रदेश से होने वाले सभी प्रकार के बोवाइन मीट (Bovine Meat) निर्यात पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।
मांस निर्यात को लेकर उठाए गंभीर सवाल
प्रेस वार्ता में सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि भारत के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि भैंस के मांस की आड़ में गोवंश की अवैध हत्या हो रही है और बिना डीएनए परीक्षण के मांस का निर्यात किया जा रहा है।
यह भी दावा किया गया कि राज्य में भैंसों की संख्या और मांस निर्यात की मात्रा के आंकड़ों में भारी विसंगति है, जो गंभीर जांच की मांग करती है।
40 दिन का अल्टीमेटम, संत समाज के समागम की चेतावनी
शासन को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार के लिए 40 दिनों का समय दिया गया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यदि इस अवधि में गोमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं दिया गया और मांस निर्यात पर रोक का शासनादेश जारी नहीं हुआ, तो आगामी 10-11 मार्च को लखनऊ में सम्पूर्ण संत समाज का समागम किया जाएगा।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि उस स्थिति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘नकली हिंदू’ घोषित करने का निर्णय लिया जा सकता है।
जनता से आह्वान
प्रेस वार्ता के अंत में इसे किसी व्यक्ति या पद की लड़ाई न बताते हुए ‘सनातन धर्म की आत्मा की रक्षा’ का प्रश्न बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि भगवान राम और कृष्ण की भूमि उत्तर प्रदेश का मांस निर्यात का केंद्र बनना चिंताजनक है और अब निर्णय सरकार के हाथ में है कि वह संत समाज का विश्वास अर्जित करती है या इतिहास के कठघरे में खड़ी होती है।

rajeshswari
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Shiv murti

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