वाराणसी: मनरेगा मजदूर यूनियन ने ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक’ के विरोध में की बड़ी बैठक
विधेयक वापस लेने की मांग
वाराणसी (जनवार्ता) : राजातालाब विकास खंड के भीमचंडी गांव स्थित ब्रह्मबाबा मंदिर प्रांगण में बुधवार को मनरेगा मजदूर यूनियन द्वारा ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ के अंतर्गत एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में सैकड़ों मनरेगा मजदूरों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और केंद्र सरकार के प्रस्तावित ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक’ (विबी-जी राम जी एक्ट, 2025) के खिलाफ जोरदार विरोध जताया।


यूनियन कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की। उनका आरोप है कि यह विधेयक मनरेगा योजना की मूल भावना को कमजोर करेगा और ग्रामीण गरीबों के अधिकारों की अनदेखी करेगा। बैठक में मनरेगा को जीवनरेखा बताते हुए इसमें किसी भी बदलाव का विरोध किया गया।
यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर ने संबोधन में कहा, “मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए एकमात्र सहारा है। यह योजना महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी है और इसमें 100 दिनों की रोजगार गारंटी मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा देती है। नया विधेयक नाम बदलकर और कुछ प्रावधानों में बदलाव लाकर मजदूरों के हितों पर हमला है। हम सरकार से मांग करते हैं कि मनरेगा की मूल संरचना बरकरार रखी जाए और श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें।”
कार्यक्रम का नेतृत्व यूनियन की संयोजिका रेनू पटेल ने किया, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने संचालन किया। अध्यक्षता निर्मला देवी ने की। बैठक में मुस्तफा, सरोज पटेल कविता, पूजा गौतम, शांति, राधा, शुशीला, मंशा, राजकुमारी, राधिका सहित बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विधेयक के माध्यम से मनरेगा को प्रतिस्थापित करने की कोशिश की जा रही है, जो ग्रामीण भारत के लिए घातक साबित हो सकता है। अंत में सभी ने मनरेगा बचाने के संकल्प के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाने का ऐलान किया।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 को लेकर देशभर में चर्चा और विवाद जारी है। मजदूर यूनियन का यह विरोध स्थानीय स्तर पर योजना के प्रति बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

