वाराणसी : मकर संक्रांति के दूसरे दिन भी बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ी अपार श्रद्धालुओं की भीड़
वाराणसी (जनवार्ता) : उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी काशी (वाराणसी) में मकर संक्रांति पर्व का उत्साह दूसरे दिन भी थमा नहीं। शुक्रवार को बाबा काशी विश्वनाथ के पावन दरबार में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। माघ मेले के पलट प्रवाह और मकर संक्रांति के पावन अवसर पर लाखों भक्त गंगा के पवित्र घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने के बाद बाबा के दर्शन हेतु कतारबद्ध रहे।

दशाश्वमेध घाट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर सुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ा रहा। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु सीधे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे, जहां ब्रह्म मुहूर्त से मंगला आरती के साथ दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ और शाम तक अनवरत जारी रहा। मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का अनुपम वातावरण छाया रहा।
मंदिर परंपरा के अनुसार, मकर संक्रांति के अवसर पर बाबा विश्वनाथ का रात्रि विशेष श्रृंगार किया गया, जिसके बाद भोग आरती में चूड़ा-मटर का विशेष भोग अर्पित किया गया। भक्त इस अलौकिक श्रृंगार को देख भाव-विभोर हो उठे। मध्याह्न भोग आरती में बाबा को खिचड़ी, चूड़ा-मटर, पापड़, अचार, भाजा, तिलकुट, गजक और तिल के लड्डू आदि का भोग लगाया गया। तिल से बने विशेष मिष्ठान्नों का अर्पण किया गया, जो पर्व की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मंदिर न्यास की ओर से बताया गया कि भोग के लिए 11 कुंतल खिचड़ी तैयार की गई, जिसे भोग आरती के बाद प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया गया। इससे हजारों श्रद्धालुओं ने लाभान्वित होकर पुण्य प्राप्त किया।
इसके अलावा, पूर्व महंत स्व. कुलपति तिवारी के टेढ़ीनीम स्थित आवास पर बाबा की रजत चल प्रतिमा के समक्ष महंत पुत्र डॉ. वाचस्पति तिवारी ने तिल से बने मिष्ठान्नों का भोग अर्पित किया।
केदारघाट स्थित गौरी केदारेश्वर मंदिर में भी मकर संक्रांति के अवसर पर बाबा का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया। ब्रह्म मुहूर्त में मंगला आरती के बाद 21 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा बिल्वार्चन किया गया। यहां गौरीकेदारेश्वर को 21 मन खिचड़ी का भोग लगाया गया और प्रसाद के रूप में भक्तों में वितरित किया गया। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही गौरीकेदारेश्वर महादेव खिचड़ी में प्रकट हुए थे।
माघ मेले के कारण काशी में श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं, जिसमें बैरिकेडिंग और व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित किया गया। भक्तों ने बाबा विश्वनाथ की कृपा से पर्व का आनंद लिया और नई ऊर्जा के साथ लौटे।
काशी विश्वनाथ के दरबार में यह उत्सव आस्था का अनुपम संगम बना रहा, जो बताता है कि बनारस की आध्यात्मिकता कभी फीकी नहीं पड़ती।

