नवरात्रि घटस्‍थापना पर सूर्य ग्रहण का साया!पूजा-पाठ में किन बातों का रखें ध्‍यान?

नवरात्रि घटस्‍थापना पर सूर्य ग्रहण का साया!पूजा-पाठ में किन बातों का रखें ध्‍यान?
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नई दिल्ली। 8 अप्रैल को सोमवती अमावस्‍या पर सूर्य ग्रहण लग रहा है। इसके बाद 9 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि शुरू होंगी। हिंदू नव वर्ष भी चैत्र शुक्‍ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है। इसी दिन गुड़ी पड़वा पर्व मनाया जाता है। मां दुर्गा की आराधना के पर्व नवरात्रि के पहले दिन घटस्‍थापना होती है। सूर्य ग्रहण खत्‍म होते ही चैत्र प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। ऐसे में घटस्‍थापना और पूजा-पाठ को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है कि घटस्‍थापना के लिए शुभ मुहूर्त क्‍या होगा। साथ ही सूर्य ग्रहण के चलते घटस्‍थापना पूजा को लेकर कुछ बातों का ध्‍यान रखना भी बहुत जरूरी है।

चैत्र नवरात्रि घटस्‍थापना मुहूर्त 2024
साल 2024 का पहला सूर्य ग्रहण 8 अप्रैल की रात 9 बजकर 12 मिनट से देर रात 2 बजकर 22 मिनट तक है। चैत्र अमावस्‍या की रात को यह सूर्य ग्रहण लग रहा है। वहीं 9 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही हैं। सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है। लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में नहीं माना जाएगा। लिहाजा मातारानी के भक्‍त बिना किसी रुकावट के ना केवल घटस्‍थापना कर सकते हैं, बल्कि पूजा-पाठ भी कर सकते हैं।

इस साल घटस्थापना के लिए 2 शुभ मुहूर्त हैं। पहला शुभ मुहूर्त 9 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। वहीं घटस्‍थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 57 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।

घटस्थापना से पहले जरूर कर लें ये काम
8 अप्रैल की देर रात तक सूर्य ग्रहण रहने के कारण चैत्र नवरात्रि के पहले दिन 9 अप्रैल यानी कि कल सुबह जल्‍दी उठें। पूरे घर की साफ-सफाई करें। घर में गंगाजल छिड़कें। फिर स्‍वयं स्‍नान करके साफ कपड़े पहनें। बेहतर होगा कि लाल रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद विधि-विधान से घटस्‍थापना करें। बेहतर होगा कि इस दिन दान अवश्‍य करें।

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घटस्थापना मंत्र
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते समय यह घटस्‍थपना मंत्र जरूर बोलें। घटस्‍थापना मंत्र – ‘ओम भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धर्त्रीं। पृथिवीं यच्छ पृथिवीं दृग्वंग ह पृथिवीं मा हि ग्वंग सीः।।’

घटस्‍थापना विधि
घटस्‍थापना के लिए मिट्टी के चौड़े मुंह वाले बर्तन में सप्तधान्य बोएं। फिर उसके ऊपर जल से भरा हुआ कलश रखें। कलश के ऊपरी भाग में कलावा बांधें। फिर कलश के ऊपर चारों ओर आम या अशोक के पत्‍ते लगाएं। इसके बाद नारियल को लाल कपड़े में कलावे की मदद से लपेटकर कलश के ऊपर और पत्‍तों के बीच में रखें। कलश रखते समय घटस्थापना मंत्र जरूर पढ़ें। इसके बाद देवी का आह्वान करें। अखंड ज्‍योति जलाएं। दुर्गा सप्‍तशती का पाठ जरूर करें। अंत में आरती करें।


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