संसद तक पहुंचा मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का तोड़फोड़ विवाद

संसद तक पहुंचा मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा का तोड़फोड़ विवाद

नई दिल्ली  (जनवार्ता)। वाराणसी प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सुंदरीकरण और पुनर्विकास कार्य के दौरान महारानी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा सहित अन्य प्राचीन संरचनाओं को क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगने से राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। जनवरी 2026 में शुरू हुई यह घटना फरवरी तक संसद तक पहुंच गई, जहां 3 फरवरी को समाजवादी पार्टी के सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

rajeshswari

मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के लिए सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यहां विकास कार्य के तहत बुलडोजर से पुरानी संरचनाओं जैसे चबूतरे और मढ़ियों को हटाया गया। आरोप है कि इस दौरान लगभग 100 से 250 वर्ष पुरानी बताई जा रही अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचा या तोड़ा गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में मूर्तियां मलबे में पड़ी दिखीं, जिसने विवाद को और भड़काया। अहिल्याबाई होलकर 18वीं सदी की मराठा रानी थीं, जिन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया और कई घाटों-मंदिरों की बहाली की। पाल (गड़रिया/धनगर) समाज उन्हें प्रमुख नेता मानता है और पूरे देश में उनकी पूजा होती है। विकास के नाम पर उनकी विरासत का अपमान होने का दावा किया जा रहा है।

मंगलवार को सपा महासचिव राम गोपाल यादव के नेतृत्व में सांसदों ने संसद के मकर गेट पर अहिल्याबाई होलकर की तस्वीरें लेकर प्रदर्शन किया। नारे लगाए गए और सरकार पर काशी की प्राचीन संस्कृति, गलियों, मंदिरों तथा पहचान को मिटाने का आरोप लगाया। राम गोपाल यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र में ऐसा होना दुखद है और उन्हें संज्ञान लेना चाहिए था। कांग्रेस, बसपा और अन्य विपक्षी दलों ने भी विरोध जताया तथा इसे सांस्कृतिक विरासत का विनाश बताया। पाल समाज और अहिल्याबाई से जुड़े ट्रस्ट ने भी प्रदर्शन किए, जहां कुछ जगहों पर गिरफ्तारियां हुईं।

इसे भी पढ़े   सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है'अदरक का पाउडर',बस आपको ऐसे करना है इस्तेमाल

उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि यह पुनर्विकास का हिस्सा है, जिसमें पुरानी संरचनाओं को हटाकर स्वच्छता, जगह विस्तार जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। कुछ अधिकारियों ने दावा किया कि मूर्तियां सुरक्षित हैं और नई संरचना में पुनः स्थापित की जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी जाकर वायरल तस्वीरों को एआई-जनरेटेड बताया तथा विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया। होलकर ट्रस्ट ने भी बाद में कहा कि मूर्ति क्षतिग्रस्त नहीं हुई, बल्कि स्थानांतरित कर पूजा शुरू की गई है।

यह विवाद जनवरी 2026 से गरमाया हुआ था, लेकिन 3 फरवरी को संसद पहुंचकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया। यह विकास और विरासत संरक्षण के बीच की बहस को उजागर करता है, जहां एक ओर आधुनिकीकरण की आवश्यकता है तो दूसरी ओर ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व को बचाने की मांग।

Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *