वाराणसी उत्तरी में ‘वोट जिहाद’ का गंभीर आरोप
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने 9000 फर्जी मतदाताओं की सूची डीएम को सौंपी
वाराणसी (जनवार्ता)। स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री तथा वाराणसी उत्तरी विधानसभा के पूर्व विधायक रविंद्र जायसवाल ने गुरुवार को अपने क्षेत्र में ‘वोट जिहाद’ की साजिश का बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन जांच के दौरान करीब 9000 ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए हैं, जिन्हें दो से पांच अलग-अलग स्थानों पर दर्ज किया गया है। ये नाम मुख्य रूप से एक ही व्यक्ति के डुप्लिकेट एंट्री बताए गए हैं, जिनमें कई महिलाओं के मामले शामिल हैं जो 30-40 वर्ष की उम्र पार कर चुकी हैं लेकिन पिता के नाम से वोटर बनी हुई हैं।

मंत्री ने सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में कहा कि यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में हो रहा है, जो लोकतंत्र पर सीधा हमला है। उन्होंने इसे संगठित साजिश करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करना और फर्जी वोटिंग से परिणाम प्रभावित करना है। जायसवाल ने जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार को इन 9000 संदिग्ध मतदाताओं की विस्तृत सूची सौंप दी है और मांग की है कि आधार आधारित सत्यापन कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
यह आरोप ऐसे समय में आया है जब वाराणसी जिले में विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हुई थी। इसमें कुल 5.73 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे, जिनमें मृतक, शिफ्टेड, अनुपस्थित और डुप्लिकेट मतदाता शामिल थे। वाराणसी उत्तरी और कैंट विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा, जहां क्रमशः 1.11 लाख और 1.12 लाख नाम कटे थे। कुल मिलाकर जिले के पूर्व में 31.53 लाख मतदाताओं में से 18% से अधिक नाम अपमार्जित हुए थे।
मंत्री ने बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) द्वारा esaaiaar फाइनल लिस्ट के बाद की गई गहन जांच का हवाला देते हुए कहा कि ये 9000 नाम के बाद भी बचे हुए डुप्लिकेट हैं, जो ‘वोट जिहाद’ की कोशिश दर्शाते हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे को राजनीतिक रंग न देकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए मिलकर पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करें।

