केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने किया सीवेज परियोजनाओं का निरीक्षण
गंगा-वरुणा नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम
वाराणसी (जनवार्ता)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने शुक्रवार को वाराणसी में गंगा और उसकी सहायक वरुणा नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए चल रही सीवेज अवसंरचना परियोजनाओं का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने शहर की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने, प्रमुख नालों के अशोधित पानी को रोकने और नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति पर विशेष जोर दिया।

मंत्री ने सबसे पहले भगवानपुर स्थित 55 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का जायजा लिया। लगभग 308 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस प्लांट का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में ट्रायल रन चल रहा है। श्री पाटिल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस प्लांट को हर हाल में 15 मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से संचालित कर दिया जाए। संचालन शुरू होने पर अस्सी और नक्खा जैसे प्रमुख नालों का गंदा पानी उपचारित होकर ही आगे जाएगा, जिससे गंगा और वरुणा दोनों नदियों पर प्रदूषण का दबाव काफी कम होगा।
इसके बाद मंत्री लोहता क्षेत्र (ग्राम बेदौली) पहुंचे, जहां वरुणा नदी के पुनरुद्धार के लिए 60 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 274.31 करोड़ रुपये है। प्लांट दुर्गा नाला सहित लोहता क्षेत्र के कुल 13 प्रमुख नालों को टैप करेगा, ताकि अशोधित सीवेज सीधे वरुणा में न गिरे। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण कार्य अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है।
निरीक्षण के दौरान अस्सी स्थित 50 एमएलडी मुख्य पंपिंग स्टेशन का भी दौरा किया गया। यहां अतिरिक्त सीवेज को रोकने और प्रमुख नालों को ट्रीटमेंट सिस्टम से जोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे किसी भी स्थिति में अशोधित जल नदियों में पहुंचने से रोका जा सकेगा।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण में महापौर अशोक कुमार तिवारी, महानिदेशक नमामि गंगे राजीव कुमार मित्तल, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल सहित नमामि गंगे, उत्तर प्रदेश जल निगम और अन्य संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति रही।
यह दौरा नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत वाराणसी में सीवेज प्रबंधन योजनाओं को नई गति प्रदान करेगा। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त प्रतिबद्धता से काशी जल्द ही स्वच्छ, निर्मल गंगा और वरुणा वाली पवित्र नगरी के रूप में उभरेगी, जहां प्रदूषण मुक्त नदियां जीवन और संस्कृति दोनों को नई ऊर्जा देंगी।

