दालमंडी प्रकरण : सपा नेताओं को पुलिस ने किया नजरबंद
बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में तनाव चरम पर
वाराणसी (जनवार्ता) । दालमंडी इलाके में प्रशासन द्वारा सड़क चौड़ीकरण और काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर से जुड़ी पहुंच सुधार के लिए चलाई जा रही बुलडोजर कार्रवाई ने राजनीतिक विवाद को नई ऊंचाई दे दी है। फरवरी की शुरुआत से जारी इस अभियान में कई पुरानी या जर्जर संरचनाओं को ध्वस्त किया गया, जिससे प्रभावित दुकानदारों और निवासियों में भारी रोष फैला हुआ है। विरोध के दौरान कुछ लोगों ने अपनी दुकानों या घरों में आग लगाने जैसी चरम प्रतिक्रियाएं दीं, जिससे इलाके में तनाव बढ़ा और पुलिस ने कई व्यक्तियों को हिरासत में लिया।

समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है और इसे पिछड़ा, दलित तथा अल्पसंख्यक समुदायों पर लक्षित कार्रवाई करार दिया है, जबकि प्रशासन का दावा है कि यह पूरी तरह सार्वजनिक हित और विकास कार्य के लिए आवश्यक है। शनिवार को सपा ने अखिलेश यादव के निर्देश पर 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित किया, जो पीड़ित दुकानदारों और परिवारों से मिलने दालमंडी जाने वाला था। इसकी अगुवाई में विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव का नाम भी सामने आया।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल, एमएलसी आशुतोष, पूर्व प्रत्याशी पूजा यादव, दिलशाद, कामेश्वर दीक्षित उर्फ किशन, अशफाक अहमद जैसे कई नेता शामिल थे। घोषणा के तुरंत बाद पुलिस ने रात से ही इन नेताओं के घरों के बाहर पहरा बिठा दिया और उन्हें घर में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया। सपा कार्यालय तथा सर्किट हाउस के आसपास भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि कोई मार्च या प्रदर्शन न हो सके। नजरबंद नेताओं ने पत्रकारों से बातचीत में इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि पीड़ितों की हालत जानना भी अब अपराध हो गया है।
पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि वे खुद सपा नेताओं से मिलने पहुंचेंगे। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में तनाव को और बढ़ा रही है, जहां विपक्ष बुलडोजर एक्शन को राजनीतिक हथियार बता रहा है। अधिक ताजा जानकारी के लिए स्थानीय समाचार स्रोतों या आधिकारिक बयानों पर नजर रखें।

