वाराणसी में आसाराम को वीआईपी ट्रीटमेंट देने की चर्चा, पुलिस और मंदिर प्रशासन ने किया इन्कार
वाराणसी (जनवार्ता)। दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे और फिलहाल अंतरिम जमानत पर बाहर चल रहे स्वयंभू संत आसाराम बापू के वाराणसी आगमन के बाद उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि पुलिस और मंदिर प्रशासन ने इन आरोपों से इन्कार किया है।
बताया जा रहा है कि अयोध्या से वाराणसी पहुंचने के बाद आसाराम हरहुआ क्षेत्र के अनौरा स्थित अपने आश्रम में ठहरे हुए हैं। उनके आगमन की सूचना मिलते ही पूर्वांचल और बिहार से बड़ी संख्या में अनुयायी दर्शन के लिए पहुंचने लगे। लगभग 12 वर्षों बाद आश्रम परिसर में फिर से पहले जैसी हलचल दिखाई दी। जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर, आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली समेत बिहार के कई जिलों से भी अनुयायी पहुंचे।

आश्रम परिसर में सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे। सत्संग हॉल में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन मुख्य द्वार पर जमा कराए जा रहे थे और पहचान पत्र भी लिए जा रहे थे। सेवादारों को निर्देश दिए गए थे कि अंदर की कोई भी गतिविधि कैमरे में कैद न होने पाए।
रविवार को आसाराम ने व्यास पीठ से अपने अनुयायियों को संबोधित भी किया। दोपहर करीब दो बजे उनका काफिला अनौरा आश्रम से शहर स्थित अलईपुरा आश्रम के लिए रवाना हुआ। चर्चा यह भी रही कि वह गंगा किनारे किसी शांत स्थान पर समय बिताने गए थे।
इसके बाद उनके बाबा दरबार में दर्शन करने पहुंचने की बात सामने आई। बताया गया कि उनकी गाड़ी मंदिर के वीआईपी गेट नंबर चार के पास तक गई और वहां से उन्हें पुलिस सुरक्षा के बीच दर्शन के लिए ले जाया गया। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें वीआईपी सुविधा दिए जाने की चर्चा शुरू हो गई।
हालांकि मंदिर प्रशासन का कहना है कि आसाराम को किसी प्रकार का विशेष प्रोटोकॉल नहीं दिया गया और उन्हें सामान्य श्रद्धालुओं की तरह ही दर्शन की अनुमति दी गई। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केवल सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है।

