महाराष्ट्र : बलात्कार के आरोपी ‘कैप्टन’ के साथ महिला आयोग अध्यक्ष की पुरानी तस्वीरें-वीडियो वायरल
इस्तीफे की मांग तेज
नाशिक (जनवार्ता) । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा तूफान उठ खड़ा हुआ है। नाशिक के स्वयंभू ज्योतिषी और ‘कैप्टन’ के नाम से मशहूर अशोक खरात को बलात्कार, लैंगिक शोषण और महिलाओं को गुंगी देकर शोषण करने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में उनके मोबाइल और पेन ड्राइव से ५८ आपत्तिजनक वीडियो बरामद होने की बात सामने आई है, जिससे कई महिलाओं के साथ शोषण की आशंका जताई जा रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर मामले की गहन जांच चल रही है।

खरात ने आध्यात्मिक अनुष्ठान, ज्योतिष और अंकशास्त्र के बहाने महिलाओं का भरोसा जीता और उनका लंबे समय तक शोषण किया। एक ३५ वर्षीय महिला की शिकायत पर १८ मार्च को उन्हें क्राइम ब्रांच ने अटक किया था। जांच में पता चला कि वह मर्चेंट नेवी से रिटायर्ड हैं और ‘श्री शिवनिका संस्थान’ ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं, जहां कई राजनीतिक-सामाजिक हस्तियां जुड़ी हुई हैं।
विवाद तब और भड़क गया जब सोशल मीडिया पर रूपाली चाकणकर की खरात के साथ पुरानी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए। इनमें रूपाली चाकणकर खरात के पैर धोते हुए (पाद्यपूजा), सिर पर छत्र धारण करती हुई और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में दिख रही हैं। वे ट्रस्ट से जुड़ी बताई जा रही हैं, जिससे महिला आयोग जैसी संस्था की निष्पक्षता और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाली भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। शिवसेना (उद्धव गुट) की सुषमा अंधारे और संजय राउत ने कहा कि खरात कई सत्ताधारी मंत्रियों के गुरु थे और अब उनके संबंधों से कई लोगों की नींद उड़ी है। संजय राउत ने मुख्यमंत्री को व्यंग्यपूर्वक ‘शुक्रिया’ कहा। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) की रूपाली ठोंबरे पाटील ने आरोप लगाया कि ५८ वीडियो से ५८ महिलाओं पर अत्याचार का अंदेशा है और चाकणकर ट्रस्ट से जुड़ी होने के कारण सबूत नष्ट कर सकती हैं, इसलिए उन्हें सह-आरोपी बनाकर इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस के विजय वडेट्टीवार और अन्य नेताओं ने भी इस्तीफे की मांग की है। सामाजिक कार्यकर्ता और कई संगठन भी महिला सुरक्षा की संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।
रूपाली चाकणकर ने अपना बचाव करते हुए कहा कि उनका खरात से संबंध केवल सामाजिक और ट्रस्ट की गतिविधियों तक सीमित था। उन्हें उसके अपराधों की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने अपील की कि सोशल मीडिया की सामग्री पर जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकालें और कानून को अपना काम करने दें।

