14 सूत्रीय मांगों को लेकर पंचायत सहायकों ने डीपीआरओ और एडीएम को सौंपा ज्ञापन
15 जून को लखनऊ में धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
वाराणसी (जनवार्ता) । जनपद वाराणसी के आठों विकास खंडों के पंचायत सहायकों ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर डीपीआरओ और एडीएम को 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। साथ ही एडीएम को भी अलग से ज्ञापन दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 14 दिनों के अंदर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो 15 जून को लखनऊ के ईको गार्डेन में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

पंचायत सहायकों ने बताया कि वर्ष 2021 के अंत में पंचायती राज विभाग द्वारा उनकी नियुक्ति की गई थी। तब से उन्हें मात्र 6000 रुपये प्रतिमाह का अल्प मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में गुजारा चलाना बेहद मुश्किल बना रहा है। यह राशि एक मनरेगा मजदूर की दिहाड़ी (200 रुपये प्रतिदिन) से भी कम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत सहायकों से न केवल अपने विभाग का काम कराया जा रहा है, बल्कि दूसरे विभागों का काम भी जबरन लिया जाता है। अधिकारी अक्सर कहते हैं कि “दो-चार दिन का काम है, कर दीजिए”।
प्रतिनिधिमंडल ने कम्प्यूटर आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करने, पंचायत सहायक पोर्टल विकसित करने, ग्राम सचिवालय में सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने, कार्य समय व अवकाश संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने, 6000 रुपये मानदेय को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह (ग्राम सचिव के समकक्ष) करने या न्यूनतम कुशल मजदूरी लागू करने, अनुबंध समाप्त कर सेवा नियमावली बनाने, विवाहोपरांत महिला पंचायत सहायकों के स्थानांतरण की व्यवस्था करने, आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने, पहचान पत्र जारी करने तथा गैर-विभागीय कार्यों पर पूर्ण रोक लगाने समेत अन्य मांगों को शामिल किया है।
ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से जिला उपाध्यक्ष गुलाम हुसैन, जिला प्रभारी राधिका देवी, मीडिया प्रभारी शिवेश पाण्डेय के साथ पूजा कन्नौजिया, जितेंद्र पटेल, अमित कुमार, पूनम भारती, कपिल कुमार, दीक्षा गुप्ता, यश पाल, बृजेश कुमार, मनीषा देवी, आराधना सिंह, आशीष कुमार, अभिषेक पटेल, दीपा देवी, प्रिया पटेल, ट्विंकल सिंह, सीमा पटेल, जयकुमार, सुनील कुमार आदि पंचायत सहायक मौजूद रहे।
पंचायत सहायकों का कहना है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें उचित सम्मान और वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र संज्ञान लेने की अपील की है।

