पीएम स्वनिधि योजना के छह साल: रेहड़ी-पटरी कारोबारियों को मिली नई पहचान
वाराणसी (जनवार्ता)। प्रधानमंत्री स्वनिधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है। योजना के छह वर्ष पूरे होने पर लाभार्थियों ने बताया कि आसान ऋण सुविधा ने न केवल उनके व्यवसाय को नई गति दी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया।
गाजियाबाद की बबिता इसका एक प्रमुख उदाहरण हैं। पूजा सामग्री बेचकर परिवार का भरण-पोषण करने वाली बबिता कोविड-19 महामारी के दौरान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही थीं। इसी दौरान उन्हें पीएम स्वनिधि योजना की जानकारी मिली और उन्होंने इसके तहत ऋण प्राप्त किया। समय पर ऋण चुकाने के बाद उन्हें अगली किस्त भी मिली, जिससे उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया। कुल 50 हजार रुपये की सहायता से उन्होंने सड़क किनारे लगने वाली अपनी दुकान को स्थायी स्वरूप दिया। वर्तमान में वह अगरबत्ती, दीया, फूल, नारियल और अन्य पूजा सामग्री बेचकर प्रतिदिन दो से तीन हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
बबिता का कहना है कि योजना ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना, बीमा सुरक्षा और राशन जैसी अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से उनके परिवार के जीवन स्तर में भी सुधार आया है।
उधर, वाराणसी के सारनाथ निवासी विष्णु शंकर भारद्वाज भी पीएम स्वनिधि योजना को छोटे व्यापारियों के लिए वरदान मानते हैं। पत्थर की मूर्तियां, मालाएं और उपहार सामग्री का कारोबार करने वाले विष्णु बताते हैं कि पहले बैंक से ऋण प्राप्त करना कठिन था, लेकिन इस योजना ने छोटे व्यापारियों के लिए वित्तीय सहायता के रास्ते आसान कर दिए हैं। उनका कहना है कि ऋण सुविधा से कारोबार बढ़ा है और आत्मविश्वास के साथ सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हुई है।
विष्णु ने प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि अब सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रही है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है। उनका मानना है कि पीएम स्वनिधि योजना ने देशभर के लाखों छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


