दरियापुर का टायर कारखाना बना रोजगार की नई उम्मीद, पलायन पर लग सकता है विराम

दरियापुर का टायर कारखाना बना रोजगार की नई उम्मीद, पलायन पर लग सकता है विराम

सारण (जनवार्ता) । सारण जिले के दरियापुर प्रखंड में शीतलपुर बिजली ग्रिड के समीप हाजीपुर-छपरा फोरलेन (एनएच-19) के किनारे स्थापित सेंट्रो इंडस्ट्रियल टायर कारखाने में उत्पादन शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं खुल गई हैं। लंबे इंतजार के बाद उत्पादन शुरू होने से स्थानीय लोगों में उत्साह है और इसे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कारखाने के संचालन से युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों की ओर रोजगार के लिए होने वाले पलायन में कमी आने की उम्मीद है। तकनीकी और औद्योगिक कार्यों में दक्ष श्रमिकों को इसका विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कारखाने का निर्माण कार्य वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। मशीनों की स्थापना, तकनीकी प्रक्रियाओं और आवश्यक स्वीकृतियों के बाद फरवरी 2026 से उत्पादन प्रारंभ किया गया। शुरुआती दौर में कच्चे माल की कमी और तकनीकी चुनौतियों के कारण उत्पादन प्रभावित रहा, लेकिन अब उत्पादन नियमित रूप से किया जा रहा है।
रेल पहिया कारखाने के बाद यह दरियापुर क्षेत्र की दूसरी प्रमुख औद्योगिक इकाई बनकर उभरा है। कारखाना प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में प्रतिदिन करीब एक हजार टायरों का उत्पादन किया जा रहा है। यहां साइकिल, रेंजर साइकिल और ठेला के विभिन्न प्रकार के टायर तैयार किए जा रहे हैं। सारण जिले में बड़े पैमाने पर साइकिल टायर निर्माण करने वाला यह पहला उद्योग है।

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कारखाने के शुरू होने से स्थानीय व्यापारियों को भी राहत मिली है। पहले साइकिल टायर की खरीद के लिए उन्हें लुधियाना सहित अन्य औद्योगिक शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होने से परिवहन लागत में कमी आने के साथ समय की भी बचत हो रही है।

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प्रबंधन के अनुसार उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल लुधियाना, दिल्ली और कोलकाता से मंगाया जाता है। वर्तमान में यहां 18 कुशल और दो अकुशल श्रमिक कार्यरत हैं। उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि की योजना है। श्रमिकों को उनकी दक्षता और कार्य के आधार पर वेतन दिया जाता है।
कारखाने में तैयार टायरों की औसत कीमत करीब 170 रुपये है। साप्ताहिक कारोबार सात से आठ लाख रुपये तक पहुंच चुका है। यहां निर्मित टायरों की आपूर्ति सारण, पटना, नेपाल तथा आसपास के कई जिलों में की जा रही है, जिससे उद्योग का बाजार लगातार विस्तार पा रहा है।


स्थानीय लोगों का मानना है कि पहले रोजगार के लिए कुशल श्रमिकों को लुधियाना और जालंधर जैसे औद्योगिक शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें अपने ही जिले में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ गई है। इससे श्रमिकों को परिवार के साथ रहने का अवसर मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


कारखाना प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है तथा प्रदूषण नियंत्रण और अग्निशमन विभाग के अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं। हालांकि, बिजली कटौती और लकड़ी आधारित बॉयलर के लिए पर्याप्त ईंधन की उपलब्धता अभी भी उत्पादन के सामने प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।

Shiv murti

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