लोलार्क षष्ठी पर सजा क्रीं-कुंड, बाबा के दर्शन को उमड़ी भीड़
वाराणसी (जनवार्ता)। काशी को भगवान शिव की नगरी के रूप में विश्वभर में जाना जाता है। इसी आध्यात्मिक परंपरा में क्रीं-कुंड स्थित बाबा कीनाराम स्थल अघोर साधना का प्रमुख सिद्धपीठ माना जाता है। जहाँ बाबा कीनाराम की तपोभूमि पर लोलार्क षष्ठी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।


इसे बाबा कीनाराम के जन्म के छठे दिन होने वाले छठी समारोह की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। जिसमें सुबह आश्रम की साफ-सफाई और दैनिक आरती के बाद श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए पहुंचना शुरू हुआ। वही सुबह करीब नौ बजे अघोराचार्य महाराज बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के कक्ष से बाहर आते ही घंटा, डमरू और शंखनाद के साथ ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से परिसर गूंज उठा। इसमें औघड़ तख्त पर उनके विराजमान होने के बाद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर दर्शन-पूजन किया और बाबा कीनाराम, अघोरेश्वर महाप्रभु सहित समाधियों के दर्शन किए। इस अवसर पर अघोराचार्य बाबा कीनाराम अघोर शोध एवं सेवा संस्थान के महिला मंडल की ओर से रक्तदान शिविर भी लगाया गया। इसमें आश्रम के बाहर विशाल मेले में सैकड़ों दुकानों पर खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी। प्रशासन और आश्रम प्रबंधन के समन्वय से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ

