चकिया के काली माता मंदिर में उमड़ता है आस्था का सैलाब

चकिया के काली माता मंदिर में उमड़ता है आस्था का सैलाब

18वीं शताब्दी में काशी नरेश महाराजा महीप नारायण जूदेव ने कराई थी मंदिर की स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा
(राहुल तिवारी)


चकिया/चंदौली । चकिया नगर स्थित मां काली मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दौरान यहां दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। मुगलकालीन स्थापत्य शैली में निर्मित इस प्राचीन मंदिर की धार्मिक महत्ता दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां काली अवश्य पूरी करती हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु यहां विशेष अनुष्ठान कराते हैं। मंदिर में बच्चों का मुंडन संस्कार कराने की भी विशेष परंपरा है।

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18वीं शताब्दी में हुई थी स्थापना

मंदिर के इतिहास के अनुसार, काशी स्टेट के महाराजा महीप नारायण सिंह जूदेव ने 18वीं शताब्दी में मंदिर की स्थापना कराई थी और मां काली की प्राण प्रतिष्ठा की थी। मंदिर की प्राचीनता, भव्यता और आध्यात्मिक महत्ता को लेकर अनेक लोककथाएं प्रचलित हैं। मंदिर के मध्य तीन शिवलिंग स्थापित हैं। मान्यता है कि इनकी स्थापना मंदिर निर्माण के समय ही की गई थी। मंदिर में अष्टधातु का विशाल विजय घंट भी मौजूद है, जिसे प्रातःकालीन आरती के दौरान बजाया जाता है।

तांत्रिक और वैदिक विधि से होती है पूजा

मां काली की विशिष्ट प्रतिमा और पूजा-पद्धति मंदिर को विशेष पहचान देती है। यहां वैदिक, पौराणिक और तांत्रिक विधियों से देवी का पूजन किया जाता है। प्रतिदिन सुबह और शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में स्थापित विशाल विजय घंट को पवित्र लाल वस्त्र से ढककर रखा जाता है। श्रद्धालुओं के बीच इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है।

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सूर्य की पहली किरण मां के चरणों को करती है स्पर्श

मंदिर की एक विशेष मान्यता यह भी है कि सूर्य की पहली किरण मां काली के चरणों को स्पर्श करती है। मंदिर के सामने स्थित विशाल सरोवर भी आकर्षण का केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भीषण गर्मी में भी इस सरोवर का पानी नहीं सूखता है।

मनोकामना पूर्ति की है मान्यता

मंदिर के पुजारी मल्लू झा के अनुसार, यह वैदिक और तांत्रिक पूजा-पद्धतियों वाला विशिष्ट शक्तिस्थल है। यहां मां काली की प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद मां काली पूरी करती हैं। यही अटूट विश्वास नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के रूप में दिखाई देता है।

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