बांग्‍लादेश चुनाव में साथ आए भारत और चीन,अमेरिका को झटका

बांग्‍लादेश चुनाव में साथ आए भारत और चीन,अमेरिका को झटका
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ढाका। बांग्लादेश में नई सरकार चुनने के लिए इलेक्शन हो रहा है। देश में 12वें आम चुनाव के लिए 7 जनवरी को वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव पर देश के लोगों के साथ-साथ दुनिया के दूसरे देशों की भी निगाहें लगी हैं। इसमें खासतौर से चीन और भारत शामिल हैं,जो पड़ोसी होने के नाते बांग्लादेश के चुनाव पर करीबी नजर रख रहे हैं। भारत और चीन के बीच संबंध बीते काफी समय से सहज नहीं हैं, कई मुद्दों पर दोनों देशों में तनातनी चल रही है लेकिन बांग्लादेश में दोनों एक ही सरकार चाहते हैं। भारत और चीन दोनों ही बांग्लादेश की मौजूदा पीएम शेख हसीना की सत्ता में वापसी चाहते हैं। भारत और चीन दोनों ही बांग्लादेश की मौजूदा पीएम शेख हसीना की सत्ता में वापसी चाहते हैं। भारत और चीन की इस जुगलबंदी से अमेरिका को बड़ा झटका लगा है जो शेख हसीना के ख‍िलाफ अभियान चलाए हुए है।

बांग्लादेश में 7 जनवरी को होने वाले चुनाव कई महत्वाकांक्षाओं के लिए एक उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बन गए हैं। इसमें भारत के बफर स्टेट की प्राथमिकताएं हैं तो लेकर चीन का बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट, अमेरिका अपने रणनीतिक हित देख रहा है तो रूस बुनियादी ढांचे के अपने इंट्रेस्ट तलाश रहा है। भारत और चीन दोनों का चुनाव प्रक्रिया के नतीजों पर बड़ा दांव है, इसकी वजह ना सिर्फ बांग्लादेश के साथ उनके मजबूत आर्थिक संबंध हैं, बल्कि क्षेत्र में उनकी व्यापक प्रतिद्वंद्विता भी इसका कारण हैा ढाका दो एशियाई दिग्गजों से साझेदारी की अपेक्षाओं को कैसे संभालता है यह महत्वपूर्ण है, और इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर है।

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1971 के मुक्ति संग्राम में भारत के समर्थन के चलते बांग्लादेश का हमेशा से ही भारत के प्रति नरम रुख रहा है। इतिहास के इस महत्व के इतर भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2021-22 में 15 बिलियन डॉलर से अधिक का रहा है। भारत बांग्लादेश को एक महत्वपूर्ण बफर के रूप में मानता है और राष्ट्रीय विकास के लिए आवश्यक बंदरगाहों और पावर ग्रिड पहुंच में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है। ऐतिहासिक संबंध और भौगोलिक निकटता इस व्यापार संबंध को बढ़ाती है। दूसरी ओर चीन के साथ बांग्लादेश का दोतरफा व्यापार 2022 में 25 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया। बांग्लादेश रणनीतिक रूप से भी चीन के साथ जुड़ा है, जो मेगा परियोजनाओं के माध्यम से अपने परिदृश्य को बदलने में मदद कर रहा है।

भारत और चीन दोनों ने बांग्लादेश में काफी निवेश किया है। प्रधानमंत्री हसीना का भी कई साझेदारियों को संभालने में निपुणता रही है। 2041 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा प्राप्त करने के प्रयास में बांग्लादेश ने उभरती गतिशीलता के बीच संबंधों को संतुलित करते हुए भारत और चीन दोनों की आर्थिक और तकनीकी शक्तियों का रणनीतिक रूप से उपयोग किया है। क्षेत्रीय दिग्गजों के हितों में सामंजस्य बिठाने वाले एक छोटे पड़ोसी के रूप में बांग्लादेश ने एक साथ उन देशों यानी भारत-चीन के साथ सहयोग को आगे बढ़ाया है जो एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हैं।

ये चुनाव भारत और चीन के लिए क्यों मायने रखता है?
बांग्लादेश में मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इस चुनाव का बहिष्कार किया है और शेख हसीना की वापसी तय मानी जा रही है। बांग्लादेश में भारत और चीन दोनों ही चुनाव के बाद राजनीतिक और आर्थिक जोखिमों से सावधान हैं। चीन का 38 अरब डॉलर की बीआरआई प्रोजेक्ट हसीना सरकार की निरंतरता पर निर्भर करती है। वहीं अगर प्रधानमंत्री हसीना पद से हटती हैं तो भारत को भी वैकल्पिक रणनीतियां तलाशनी होंगी। बांग्लादेश के चुनाव के दूरगामी परिणामों को देखते हुए ही भारत और चीन दोनों ने मौजूदा सत्ता के पीछे अपना जोर लगा दिया है, जो अमेरिका के लिए भी झटके से कम नहीं है।

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बता दें कि 76 साल की शेख हसीना 2009 से बांग्लादेश की सत्ता में हैं। वह लगातार चौथी बार पीएम बनने की लड़ाई लड़ रही हैं। हालांकि उन पर चुनाव में धांधली के गंभीर आरोप भी लगे हैं। कार्यवाहक सरकार में चुनाव कराने की मांग ना माने जाने की वजह से मुख्य विपक्षी दल बीएनपी इस इलेक्शन का बहिष्कार कर रहा है। बांग्लादेश में 7 जनवरी को 300 सीटों के लिए करीब 12 करोड़ मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे। मतदान के तुरंत बाद रविवार शाम को गिनती शुरू हो जाएगी और सोमवार सुबह नतीजे आ जाएंगे।


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