Wednesday, August 17, 2022
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मोदी की 40 घंटे में 23 बैठकें,4 दोस्तों के ‘लव इन टोक्यो’से चीन को क्यों लग रही मिर्ची?

Updated on 23/May/2022 1:27:54 PM

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय जापान में हैं। PM वहां 40 घंटे रुकने वाले हैं और ताबड़तोड़ 23 अलग-अलग बैठकें करेंगे। वह दुनिया के तीन बड़े नेताओं से मिलने वाले हैं। सबसे महत्वपूर्ण 24 मई को वह क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वही क्वाड, जिसके बारे में चीन खुद कहता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उस पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया है। बैठक कल होनी है लेकिन चीन को इतनी मिर्ची लगी है कि 48 घंटे पहले ही अमेरिका की हिंद-प्रशांत रणनीति कहते हुए वह बोलने लगा कि इसका फेल होना तय है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि यह रणनीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा चिंता पैदा कर रही है। वैसे, चीन की चिंता यूं ही नहीं है। वह छोटे-छोटे देशों के द्वीपों पर गाहे-बगाहे दावा जताता रहता है। जबकि अमेरिका, भारत समेत दुनिया के ज्यादातर देश मुक्त और खुले क्षेत्र की बातें करते हैं। मोदी ऐसे समय में जापान की यात्रा पर पहुंचे हैं, जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है। क्वाड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीस के साथ बैठकर चर्चा करेंगे। इन चार दोस्तों की टोक्यो में गुफ्तगू चीन को पच नहीं रही है।

नाटो से क्यों जोड़ रहा चीन? मंशा समझिए
चीन ने कहा है कि एशिया-प्रशांत को किसी ब्लॉक,‘नाटो या शीत युद्ध’ में तब्दील करने की कोशिश सफल नहीं होगी। दरअसल,क्वाड के सदस्य मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर बल देते हैं। बीजिंग क्वाड को ‘एशियाई नाटो’ कहकर निंदा करता है। उसे लग रहा है कि क्षेत्र में अब उसकी मनमर्जी नहीं चलेगी। दरअसल,NATO की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति बनाए रखने और यूरोप में सोवियत विस्तार के खतरे से निपटने के लिए की गई थी। पिछले दिनों जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो उसके पड़ोसी देशों में नाटो सेनाएं अलर्ट हो गई थीं,क्योंकि वे देश नाटो के सदस्य हैं। चीन को लग रहा है कि भविष्य में उसने किसी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई की तो दुनिया के ताकतवर देश एकसाथ आ सकते हैं।

उधर,अमेरिका,भारत एवं दूसरे देश संसाधन संपन्न इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के चलते मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। चीन विवादित दक्षिण चीन सागर के पूरे हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि ताईवान,फिलिपींस,ब्रूनेई,मलेशिया और वियतनाम उसके कुछ-कुछ हिस्सों पर दावा करते हैं। चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान भी बना लिए हैं। चीन का पूर्वी चीन सागर में जापान के साथ भी विवाद है।

जापान में 40 हजार भारतीय
जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष विमान जापान की धरती पर लैंड हुआ, मोदी का ट्वीट आता है, ‘तोक्यो पहुंच गया हूं। यात्रा के दौरान क्वाड शिखर सम्मेलन सहित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लूंगा, क्वाड नेताओं से मुलाकात करूंगा, जापान के उद्योगपतियों से संवाद करूंगा और भारतीय समुदाय से मुलाकात होगी।’ जापान में भारतीय समुदाय के करीब 40,000 लोग रहते हैं। पीएम के इस दौरे पर लाखों-करोड़ों भारतीयों की नजरें हैं।

बाइडन करेंगे नई डील
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन नए हिंद-प्रशांत व्यापार समझौते की शुरुआत करने वाले हैं। इसे क्षेत्र के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता का संकेत देने माना जा रहा है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि नया हिंद-प्रशांत व्यापार समझौता आपूर्ति शृंखला, डिजिटल व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, कर्मचारी सुरक्षा और भ्रष्टाचार निरोधी प्रयासों आदि पर अमेरिका और एशियाई अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा निकटता से काम करेंगी।

बाइडन की तोक्यो यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने वाले हैं। व्हाइट हाउस ने अक्टूबर 2021 में ‘ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप’ की जगह एक नए आर्थिक ढांचे के निर्माण की योजना की घोषणा की थी, जिसे अमेरिका ने 2017 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासन के दौरान रद्द कर दिया था। नया समझौता ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में उसे बढ़त हासिल है।

विस्तारवादी सोच रखने वाला पड़ोसी मुल्क चीन की कोशिश है कि क्वाड को दुनिया की नजरों में छोटा या बेमतलब जैसा साबित किया जाए। उसके मंत्री यह भी कह चुके हैं कि क्वाड समंदर में पानी पर झाग जैसा है जो हवा से उड़ जाएगा। जबकि हकीकत यह है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्वाड एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है यही वजह है कि चीन बौखलाया हुआ है। उसकी धमकियों और दबदबे के दावों से दक्षिण चीन सागर और पूरब में जापान भी परेशान है। चीन है कि वह एक-एक कर दावों की लिस्ट लंबी करता जा रहा है। ऐसे में क्वाड के इन चार दोस्तों ने एक सूत्रीय फॉर्म्युला सामने रखा है कि समुद्री क्षेत्र में नियम एकसमान होने चाहिए। इन देशों का तर्क है कि यह एक नियम आधारित व्यवस्था बनाने की पहल है न कि कोई ऐंटी-चीन गुट।

चीन के साथ भारत का सीमा विवाद दशकों से है। दो साल पहले पूर्वी लद्दाख में चीन ने दुस्साहस किया। अरुणाचल प्रदेश पर वह बेमतलब के दावे करता रहता है। क्वाड में भारत को देख उसे चिंता सताने लगी है कि आगे चलकर टकराव होता है तो अमेरिका, जापान समेत ताकतवर देश भारत के साथ खड़े हो सकते हैं और यह चीन कभी नहीं चाहेगा। भारत का साफ कहना है कि क्वाड चीन विरोध नहीं है। क्वाड में सिद्धांत बन रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तोक्यो में उस कार्यक्रम में शामिल होंगे, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अपनी महत्वाकांक्षी हिंद-प्रशांत आर्थिक रूपरेखा (आईपीईएफ) का शुभारंभ करने वाले हैं। IPEF एक पहल है, जिसका उद्देश्य समान विचार वाले देशों के बीच हरित ऊर्जा, आपूर्ति शृंखला और डिजिटल कारोबार के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करना है।

चीन की एक बिजनस टेंशन भी है। अमेरिका के एक नया समूह बनाने के फैसले से वह बेचैन है। बाइडन प्रशासन IPEF को पूर्वी और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के साथ जुड़ने का नया जरिया मान रहा है। अमेरिका इसे 21वीं सदी की आर्थिक व्यवस्था बता रहा है, ऐसे में तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के नाम पर दुनिया में प्रभाव बढ़ाने की चीन की कोशिशें फेल होती दिख रही हैं।

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