बनास डेयरी से पूर्वांचल में आयेगी दुग्ध क्रांति

बनास डेयरी से पूर्वांचल में आयेगी दुग्ध क्रांति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल करेंगे 600 करोड़ की 30 एकड़ में बने बनारस डेरी परियोजना का शुभारंभ
500 लोगों को प्रत्यक्ष और1 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
वाराणसी।बनास काशी संकुल परियोजना एक ऐतिहासिक कदम है जो वाराणसी के यूपी सीडा करखियांव, एग्रोपार्क में 30 एकड़ क्षेत्र में निर्माण किया गया है। इस प्लांट का शिलान्यास 23 दिसंबर, 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से किया गया था।23 फरवरी को वे स्वयं लोकार्पण करेंगे।

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ये जानकारी बनास डेयरी परिसर में आयोजित प्रेस मीट में अध्यक्ष शंकर चौधरी ने दी।
उन्होंने बताया कि बनास डेरी वर्तमान में पूर्वांचल क्षेत्र में वाराणसी, मीरजापुर, गाज़ीपुर और रायबरली जिलों से प्रति दिन लगभग 3 लाख लीटर दूध एकत्र कर रही है और इस संयंत्र के चालू होने के बाद, बनास डेरी बलिया, चौदौली, प्रयागराज, जौनपुर और अन्य जिलों से भी दूध एकत्र करेंगी। आधुनिक युग में उद्योग और पर्यावरण के मेलजोल को समझना और समायोजित करना महत्वपूर्ण है। विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर और साथ में पर्यावरण की देखभाल करने वाले परियोजनाओं की आवश्यकता है। इस संदर्भ में, बनास काशी संकुल परियोजना एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है जो उद्योग, रोजगार, और पर्यावरण को साथ में लाती है।

श्री चौधरी ने बताया कि यह परियोजना न केवल 500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेगी, बल्कि 1,00,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर भी सृजित करेगी। इस प्लांट में बनास डेयरी ने उद्योग के मानदंडों के अनुसार स्वचालन और कम पानी की आवश्यकता वाली, ऊर्जा कुशल क्लास – III रेटिंग वाली हाई-टेक मशीनरी स्थापित की है। इस प्लांट में प्रति लीटर दूध के लिए पानी की खपत सामान्य से कम होगी। इस संयंत्र में हम पानी की खपत का अधिकतम प्रतिधारण और पुन: उपयोग कर सकेंगे। ETP प्लांट के पानी का उपयोग हाउसकीपिंग, बॉयलर और प्लांट में बागवानी के उद्देश्य से किया जाएगा।

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इस परियोजना में सौर ऊर्जा संयंत्र के स्थापना के साथ-साथ पर्यावरण की संरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। साथ ही, आगंतुकों के लिए भी सुविधाएं प्रदान की गई हैं।इस परियोजना के माध्यम से किसानों और दूध उत्पादकों के साथ सहयोग और संबंधों को बढ़ावा देने के लिए छात्र यात्राओं को भी ध्यान में रखा गया है। इससे विशेष रूप से उद्यमी मानसिकता के विकास में मदद मिलेगी।

इस तरह के प्रोजेक्ट्स के माध्यम से हम न केवल उद्योग को संवर्धित करते हैं, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी उत्कृष्टता की ओर प्रगति करते हैं। बनास काशी संकुल परियोजना इस संदेश का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

परियोजना की कुल लागत 622 करोड़ है।

वैज्ञानिक पशुपालन की दिशा में बनास डेरी
उन्होंने बताया कि अर्ध-शुष्क क्षेत्र होने के बावजूद भी गुजरात में पशुपालन की वैज्ञानिक पद्धति अपनाने के कारण उत्पादकता अधिक है। उत्तर प्रदेश में इस दिशा में बहुत काम करने की गुंजाइश है, इसलिए बनास डेरी ने इसकी शुरुआत, 2021 में ही की थी। किसानों और गोपालकों के बीच पशु-पालन ज्ञान और जागरूकता विकसित करने के लिए, पूर्वांचल के 150 से अधिक स्थानीय किसानों को पालनपुर गुजरात में बुलाकर 6 दिवसीय कक्षा और फील्ड प्रशिक्षण दिया गया था। 150 उच्च गुणवत्ता वाली गिर गायें भी पूर्वांचल के किसानों को उपहार में दी गईं थीं।

कृत्रिम गर्भाधान शुरू
बनास डेरी ने 7 गांवों में कृत्रिम गर्भाधान (AI) सुविधा शुरू की हैं। बनास डेरी अपने साथ जुड़े सभी 250 गांवों में AI सेवाएं देने के लिए AI कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया में है। इसके अलावा इन AI कार्यकर्ताओं को इस तरह से कुशल बनाया जाएगा कि वे प्रारंभिक उपचार, टीकाकरण, कृमि मुक्ति कर सकें। वाराणसी के गांवों में विशेष पशुचिकित्सक सेवा भी प्रारंभ की गई है जो नियमित क्षेत्र भ्रमण करेंगे (सभी गांव माह में एक बार)। बनास डेरी वाराणसी में पशुपालन के वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर रही है। बनास डेरी ने आराजी फार्म, वाराणसी में 33 गायों में भ्रूण स्थानांतरण किया है। इसमें 23% की दर से सफलता मिली है और इनमें से 11 बछड़े पैदा हुए हैं। इनमें 10 मादा मवेशी और एक नर मवेशी है। हम आराजी फार्म में यूपी पशु विकास बोर्ड (UPLDB) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें हम स्थानीय ब्रीड्स के संरक्षण और विकास पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा, हम पशुओं के लिए कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण और पशुचिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जैसे कि बाँझपन शिविर, डीवर्मिंग, टीकाकरण इत्यादि।

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पत्रकार वार्ता में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर,जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य,मेयर अशोक तिवारी, विधायक डॉ अवधेश सिंह, डॉक्टर नीलकंठ तिवारी, भाजपा के जिला अध्यक्ष व एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, महानगर अध्यक्ष विद्यासागर राय उपस्थित थे।

बॉक्स में
बनारस की मिठाइयां,बनाएंगी अलग पहचान
अन्य ताजे दूध उत्पादों के अलावा बनास डेरी ने बनास काशी संकुल में प्रतिदिन 10,000 किलोग्राम क्षमता की अत्याधुनिक पारंपरिक भारतीय मिठाइयों के निर्माण की सुविधा स्थापित की है। इस संयंत्र में विभिन्न मिठाइयाँ जैसे लाल पेड़ा, लौंगलता, बेसन के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, रस मलाई , रबड़ी, काजू कतली, मिल्क केक, रसगुल्ला और गुलाबजामुन का निर्माण किया जाएगा। इन सभी मिठाइयों का निर्माण यथासंभव स्वचालित रूप से सबसे स्वच्छ वातावरण और उपकरणों में किया जाएगा। मिठाइयों की ताजगी, सेल्फ लाइफ और उपभोक्ताओं की सुविधा बढ़ाने के लिए लाल पेड़ा, लड्डू, लौंगलता और काजू कतली के लिए सिंगल सर्व पैकिंग की शुरुआत इस प्लांट से की जा रही है| वाराणसी की प्रसिद्ध मिठाईयों को अमूल ब्रांड के तहत राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाऐगा।

Shiv murti

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