भिंड जिला अस्पताल में डायलिसिस के दौरान गिरी छत
मरीजों के सिर के पास गिरा मलबा, बाल-बाल बची जान
भिंड। मध्यप्रदेश के भिंड जिला अस्पताल में शुक्रवार सुबह डायलिसिस सेंटर की फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। उस समय सेंटर में कई मरीजों का डायलिसिस चल रहा था। छत का मलबा एक मरीज के पलंग के पास और दूसरे मरीज के सिर के नजदीक गिरा। गनीमत रही कि कोई इसकी चपेट में नहीं आया और बड़ा हादसा टल गया।

जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब आठ बजे की है। डायलिसिस सेंटर में मरीज मशीनों से जुड़े हुए उपचार करा रहे थे। इसी दौरान छत की फॉल्स सीलिंग का एक हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिर पड़ा। तेज आवाज के साथ मलबा गिरने से मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मलबा मरीजों के बेहद करीब गिरा था। यदि यह सीधे किसी मरीज के ऊपर गिरता तो गंभीर चोट लग सकती थी।
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और फर्श पर बिखरे मलबे को हटवाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किसी मरीज के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, फॉल्स सीलिंग गिरने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। इस संबंध में तकनीकी जांच की आवश्यकता है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
भिंड जिला अस्पताल में छत गिरने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 10 मई 2026 को अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के दुग्धपान कक्ष की फॉल्स सीलिंग गिर गई थी। उस समय कमरे में महिलाएं अपने नवजात बच्चों को दूध पिला रही थीं। हादसे में कई महिलाएं घायल हुई थीं, जिन्हें ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कर उपचार दिया गया था।
मई में हुई घटना के बाद एसडीएम अखिलेश शर्मा ने अस्पताल भवन की उम्र करीब 60 से 70 वर्ष बताते हुए पूरे भवन की जांच कराने और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब डायलिसिस सेंटर में छत का हिस्सा गिरने की घटना ने अस्पताल की भवन सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
डायलिसिस के दौरान मरीज लंबे समय तक मशीन से जुड़े रहते हैं। ऐसी स्थिति में अचानक छत का मलबा गिरने पर उनके लिए तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाना भी मुश्किल होता है। अस्पताल में पहले भी इस तरह की घटना सामने आने के बावजूद यदि भवन की नियमित तकनीकी जांच नहीं हुई है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
अब जरूरत है कि अस्पताल प्रशासन डायलिसिस सेंटर समेत सभी वार्डों, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु इकाई का सुरक्षा ऑडिट कराए। साथ ही भवन की संरचनात्मक स्थिति की विशेषज्ञों से जांच कराकर जरूरी मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि मरीजों की जान जोखिम में न पड़े। फिलहाल डायलिसिस सेंटर में गिरी छत के हिस्से की मरम्मत और घटना के बाद उपचार व्यवस्था को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

