असंगठित कामगारों को बुढ़ापे में पेंशन का भरोसा, श्रम योगी मानधन योजना बनी संबल
सोनभद्र (जनवार्ता)! असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। यह योजना उन कामगारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके पास वृद्धावस्था में आय का कोई स्थायी साधन नहीं होता।


श्रम विभाग के श्रम प्रवर्तन अधिकारी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित कामगारों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कवच है। योजना के अंतर्गत 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर पात्र लाभार्थी को प्रतिमाह न्यूनतम रुपये 3000 की सुनिश्चित पेंशन दी जाएगी। पेंशनधारी की मृत्यु की स्थिति में उसके जीवनसाथी को पारिवारिक पेंशन के रूप में रुपये 1500 प्रतिमाह प्रदान करने का प्रावधान भी है।
योजना की विशेषता यह है कि श्रमिक द्वारा किए गए मासिक अंशदान के बराबर राशि केंद्र सरकार भी जमा करती है। इस योजना में रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू श्रमिक, मिड-डे मील वर्कर, ईंट-भट्ठा मजदूर, मोची, कचरा बीनने वाले, धोबी, रिक्शा चालक तथा भूमिहीन खेतिहर मजदूर शामिल हैं। पात्रता के लिए श्रमिक की मासिक आय रुपये 15,000 या उससे कम होनी चाहिए तथा आवेदन के समय आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है।
आवेदक आयकरदाता न हो और ईपीएफओ, एनपीएस या ईएसआईसी का सदस्य न हो। योजना में प्रवेश आयु के अनुसार मासिक योगदान तय है, जो 18 वर्ष की आयु में रुपये 55 से लेकर 40 वर्ष की आयु में रुपये 200 प्रतिमाह तक है। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड एवं बचत बैंक खाता या जन-धन खाता आवश्यक है। पात्र श्रमिक नजदीकी सामान्य सेवा केंद्र पर पंजीकरण करा सकते हैं।

