विश्वनाथ आश्रम का द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर: 200 वर्षों से आस्था का केंद्र, एक ही स्थान पर मिलते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य

विश्वनाथ आश्रम का द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर: 200 वर्षों से आस्था का केंद्र, एक ही स्थान पर मिलते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का पुण्य

वाराणसी (जनवार्ता)। पंचक्रोशी परिक्रमा के चतुर्थ पड़ाव शिवपुर के गिलट बाजार स्थित श्रीविश्वनाथ आश्रम में स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव मंदिर करीब 200 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से देश के अलग-अलग स्थानों पर स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन-पूजन का पुण्य लाभ प्राप्त होता है। यही वजह है कि सावन, महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख पर्वों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

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*200 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास*
बताया जाता है कि करीब दो शताब्दी पूर्व आचार्य महामंडलेश्वर जयेंद्रपुरी महाराज, गोविंद मठ के द्वारा शिवपुर के गिलट बाजार स्थित श्रीविश्वनाथ आश्रम में द्वादश ज्योतिर्लिंग शिव मंदिर की स्थापना कराई गई थी। मंदिर की स्थापना के समय देशभर से प्रकांड विद्वानों और संत-महंतों को आमंत्रित किया गया था। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई।


मान्यता के अनुसार इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र से अभिसिंचित 11 करोड़ बिल्व पत्र भगवान शिव को अर्पित किए गए थे। देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए संतों, महंतों और विद्वानों की मौजूदगी में संपन्न यह धार्मिक आयोजन मंदिर की प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है।

*एक परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन*
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां एक ही स्थान पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन होना मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करने में असमर्थ श्रद्धालु काशी में स्थित इस मंदिर में दर्शन-पूजन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
मान्यता और आस्था के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भक्त भगवान शिव के समक्ष अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और दर्शन-पूजन के बाद सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मनोकामना पूरी होने के बाद कई भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंदिर में चढ़ावा अर्पित करते हैं।

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*सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ती है भीड़*
शिवपुर के गिलट बाजार में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण सावन के महीने में मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। कांवड़िये और स्थानीय श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर भी यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगने लगती है।
वर्षभर यहां विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ होते रहते हैं। श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, संतान, स्वास्थ्य, समृद्धि और अन्य मनोकामनाओं के लिए भगवान शिव की आराधना करते हैं।

*गोविंद मठ करता है आश्रम का संचालन*
श्रीविश्वनाथ आश्रम और मंदिर का संचालन टेढ़ीनीम स्थित गोविंद मठ द्वारा किया जाता है। आश्रम परिसर में धार्मिक गतिविधियों के साथ समय-समय पर विभिन्न अनुष्ठान और धार्मिक आयोजन भी होते हैं। स्थानीय लोगों के साथ ही बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यह स्थान लंबे समय से आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
विश्वनाथ आश्रम भंडारा समिति के अध्यक्ष डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ‘डीडी’ ने बताया कि श्रीविश्वनाथ आश्रम का द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर प्राचीन समय से ही श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। यहां वर्ष में कई बार धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। सावन और महाशिवरात्रि में विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों की बाबा के प्रति गहरी आस्था है और मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार मंदिर में चढ़ावा अर्पित करते हैं।

*पंचक्रोशी परिक्रमा के पड़ाव से जुड़ी आस्था*
मंदिर के पुजारी आचार्य श्री राममणि शर्मा ने बताया कि काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा में शिवपुर का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी क्षेत्र में स्थित श्रीविश्वनाथ आश्रम का द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर पंचक्रोशी परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। प्राचीन परंपरा, धार्मिक मान्यताओं और काशी की आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं को भगवान शिव की भक्ति और आस्था से जोड़ रहा है।
करीब दो सौ वर्षों से निरंतर आस्था का केंद्र बना यह मंदिर काशी की उस धार्मिक परंपरा की झलक प्रस्तुत करता है, जहां एक ही धरा पर देशभर के प्रमुख तीर्थों और देवस्थलों की आध्यात्मिक अनुभूति श्रद्धालुओं को प्राप्त होती है।

Shiv murti

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