103वें संकटमोचन संगीत समारोह की धूमधाम से शुरुआत
हनुमत दरबार में 135 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ, 11 पद्मश्री सम्मानित कलाकारों सहित 14 मुस्लिम कलाकार भी शामिल
वाराणसी (जनवार्ता)। श्री संकटमोचन मंदिर के प्रसिद्ध वार्षिक संगीत समारोह का 103वाँ संस्करण सोमवार शाम 7:30 बजे हनुमत दरबार में शुरू हो रहा है। हनुमान जयंती के अवसर पर आयोजित यह छह दिवसीय महोत्सव 6 से 11 अप्रैल तक चलेगा।

मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने बताया कि इस बार समारोह में 135 से अधिक कलाकार लगभग 45 प्रस्तुतियाँ देंगे। खास आकर्षण 11 पद्मश्री सम्मानित कलाकारों की प्रस्तुतियाँ होंगी। पहली बार 14 मुस्लिम कलाकार भी प्रभु हनुमान के दरबार में अपनी संगीत साधना का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा 21 नए कलाकारों को भी मंच का अवसर दिया गया है।
समारोह की शुरुआत ‘रूपवाणी’ संस्था की नृत्य नाटिका ‘चित्रकूट’ से होगी। पहले दिन पंडित राहुल शर्मा संतूर, विधालाल कथक, एस. आकाश-यनेश रायकर बांसुरी-वायलिन, पद्मश्री मालिनी अवस्थी गायन, राहुल मिश्रा तबला सोलो, पंडित हरविंदर शर्मा सितार और सुश्री शिखा भट्टाचार्या कथक की प्रस्तुतियाँ होंगी।
दूसरे दिन ग्रैमी पुरस्कार विजेता पद्मश्री पंडित विश्वमोहन भट्ट मोहनवीणा, पंडित सुनील भट्ट सात्विक वीणा, उस्ताद गुलाम अब्बास खान गायन और उस्ताद अकरम खान तबला वादन करेंगे। तीसरे दिन पंडित उल्हास कसालकर गायन, विवेक सुनार बांसुरी, पद्मश्री जसपिंदर नरूला गायन, पंडित देवाशीष भट्टाचार्य गिटार और पंडित आलोक लाहिड़ी सरोद की प्रस्तुतियाँ होंगी। चौथे दिन पंडित यू राजेश मैंडोलिन और पद्मश्री अनूप जलोटा गायन सुनने को मिलेगा।
पाँचवें दिन पद्मश्री राम मोहन महाराज कथक, पद्मश्री देवेंद्र नारायण मजूमदार सरोद, पद्मश्री रोनू मजूमदार बांसुरी, पद्मश्री कंकणा बनर्जी और उस्ताद मसकुर अली खान गायन तथा बिलाल खान तबला वादन करेंगे। समारोह के अंतिम दिन 11 अप्रैल को पंडित रतिकांत महापात्रा एवं सुजाता महापात्रा ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद महताब अली नियाजी सितार, कलापिनी कोमकली गायन, सिराज अली खान सरोद, पंडित अभय रुस्तम सपोरी शततंत्री वीणा, पंडित अंजू सहाय तबला, उस्ताद शाकिर खां सितार और पंडित साजन मिश्र-श्री स्वरांश मिश्र गायन की प्रस्तुतियाँ होंगी।
प्रत्येक दिन कार्यक्रम सायंकालीन आरती के बाद शाम 7:30 बजे शुरू होगा और प्रातः कालीन आरती तक या उसके बाद तक चलता रहेगा।
यह समारोह वर्ष 1923 से निरंतर आयोजित हो रहा है और काशी की सांस्कृतिक धरोहर का अनुपम प्रतीक है। संगीत प्रेमी बड़े उत्साह से इस आयोजन का इंतजार कर रहे हैं।

