टीईटी अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में आक्रोश
धरना-प्रदर्शन कर कल जिलाधिकारी को सौंपेंगे ज्ञापन
वाराणसी (जनवार्ता) । उत्तर प्रदेश में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के खिलाफ प्राथमिक शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। विशेषकर 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम थोपना “घोर अन्याय” बताते हुए शिक्षक संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले 23, 24 और 25 फरवरी को हजारों शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर स्कूलों में पढ़ाई करते हुए विरोध जताया।


वरिष्ठ शिक्षक नेता सनत कुमार सिंह ने कहा कि टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर यह प्रावधान जबरन लागू करना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि लंबी सेवा और अनुभव के आधार पर ऐसे शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए, ताकि उनकी नौकरी और सम्मान सुरक्षित रहे।
आंदोलन के अगले चरण में 26 फरवरी को बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) कार्यालय पर भारी संख्या में शिक्षकों द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। धरने के बाद शिक्षक पैदल मार्च करते हुए शाम 4 बजे जिलाधिकारी के माध्यम से उच्चाधिकारियों को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे।
इस विरोध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संयोजक कैलाश नाथ यादव, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय, वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष अमृता सिंह के साथ रविंद्र सिंह, रविंद्र यादव, संजय सिंह, अनूप कुमार सिंह, सान्तेश्वर मिश्र, मनोज कुमार, राजेश सिंह, संजय राय, दरोगा सिंह, श्रीपादबल्लभ वक्षी, डॉ. सिद्धनाथ पांडेय, प्रमोद कुमार, ललित सिंह, विजयलाल गुप्ता, राजेन्द्र राय, शैलेंद्र सहाय, संतोष शर्मा, राज कुमार, मिथिलेश राय, डॉ. प्रमोद पांडेय, डॉ. सरोज पांडेय, प्रदीप यादव, संदीप गौतम, संतोष सिंह, रामसमुझ पटेल, आलोक सिंह, सुशील पांडेय, रीना सिंह, उषा सिंह, चंद्रावती शर्मा, पुष्पा देवी, प्रियंका मंजरी, प्रेमलता यादव, अंजू चौबे, डॉ. उषा सिंह, सुमन सिंह, अपर्णा श्रीवास्तव सहित हजारों शिक्षक सक्रिय रूप से शामिल हुए।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं पर खतरा मंडरा रहा है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसमें दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर रैली भी शामिल हो सकती है। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे नियमित शिक्षण कार्य जारी रखते हुए ही यह संघर्ष लड़ रहे हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
यह आंदोलन प्रदेश भर में शिक्षकों की एकजुटता का बड़ा उदाहरण बन गया है, जहां वर्षों की सेवा को आधार बनाकर टीईटी छूट की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है।

