बिजली कर्मियों ने सीएम योगी से की निजीकरण निर्णय निरस्त करने की मांग
वाराणसी (जनवार्ता) । विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले निजीकरण विरोधी आंदोलन के 339वें दिन बनारस सहित प्रदेश भर के बिजली कर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त करने की अपील की।


समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि पावर सेक्टर में राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदलते घटनाक्रम और देशभर में निजीकरण के विफल प्रयोगों को देखते हुए यह कदम जल्दबाजी में लिया गया है। केंद्र सरकार विद्युत वितरण निगमों के बेलआउट के लिए नया पैकेज तैयार कर रही है। पहले की एफआरपी, एपीआरडीआरपी, आरएपीआरडीआरपी, उदय और आरडीएसएस योजनाओं के तहत पूर्वांचल व दक्षिणांचल निगमों में अरबों रुपये खर्च कर ढांचा मजबूत किया जा रहा है, जिससे एटीएंडसी हानियां 2017 के 41% से घटकर 2025 में 15% रह गई हैं।

समिति ने चेताया कि स्वतंत्रता के बाद निजी कंपनियों को सरकारी क्षेत्र में लेकर राज्य विद्युत परिषद बनाई गई थी, लेकिन निजीकरण के सभी प्रयोग असफल रहे। ओडिशा में 1999 से अब तक चार निजी कंपनियां आईं, लेकिन सभी विफल साबित हुईं। रिलायंस की तीन कंपनियों के लाइसेंस 2015 में निरस्त हुए, जबकि टाटा की चार कंपनियों को जुलाई 2025 में नोटिस जारी हुआ है और उनके लाइसेंस भी जल्द रद्द हो सकते हैं।
शहरी क्षेत्रों में औरंगाबाद, जलगांव, नागपुर, गया, भागलपुर, रांची, सागर, ग्वालियर, उज्जैन आदि में फ्रेंचाइजी करार रद्द हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में आगरा की टोरेंट पावर पर 2200 करोड़ रुपये का राजस्व दबाने और प्रतिवर्ष 1000 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के आरोप हैं।
समिति ने इसे ‘मेगा घोटाला’ करार देते हुए कहा कि 42 जनपदों में निजीकरण थोपने से किसान-जनता को कोई लाभ नहीं मिलेगा। निर्णय निरस्त कर ऊर्जा निगमों में कामकाजी माहौल बहाल किया जाए।
विरोध सभा को मायाशंकर तिवारी, ओपी सिंह, राजेंद्र सिंह, अंकुर पाण्डेय, पंकज यादव, अनुराग कुमार, रोहित कुमार, संदीप कुमार, जयप्रकाश कुमार, अरुण सिंह, धर्मेंद्र यादव, रमेश कुमार, अरविंद कौशांबी, मनोज यादव, राजेश पटेल आदि ने संबोधित किया।

