गज़लकार, कवि सिद्धनाथ शर्मा का निधन
वाराणसी (जनवार्ता) । वरिष्ठ गजलकार कवि सिद्धनाथ शर्मा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे, विगत दो सप्ताह से पैनेशिया हॉस्पिटल, कबीर नगर, दुर्गाकुंड वाराणसी में भर्ती थे। 9 जून को रात्रि में डॉक्टर ने उन्हें मृत्यु घोषित कर दिया। वह किडनी रोग से ग्रसित थे। सिद्धनाथ शर्मा का जन्म 1953 में कालीमहाल, (पानदरीबा) में हुआ था। उनके पिता बीएचयू में कर्मचारी थे। वह तीन भाइयों में तीसरे नंबर के थे। बड़े भाई सोभनाथ शर्मा पहले ही स्वर्गवासी हो चुके हैं। छोटे भाई का नाम अमरनाथ शर्मा है। सिद्धनाथ शर्मा अपने पीछे बेटे विशाल शर्मा व पत्नी द्रोपती शर्मा को छोड़कर चले गए। उनकी शिक्षा दीक्षा काशी में ही हुई थी।


काशी के वरिष्ठ कवि चकाचक बनारसी, भैया जी बनारसी, गणेश प्रसाद सिंह मानव, चपाचप बनारसी व श्रीकृष्णा तिवारी के साथ मंच साझा कर चुके थे। सिद्धनाथ शर्मा तरन्नुम के बेताज बादशाह थे। उनकी गजलों की तरन्नुम पर लोग झूम उठते थे। शहर के कार्यक्रम में प्रायः उनकी भागीदारी देखने को मिलती थी। होली में चैनल पर वह खुब दिखते थे। उनकी रचना-
नव नगद ना तेरह उधार चाहिए, हमें तो सिर्फ तेरा प्यार चाहिए….
ना इधर जाइए ना उधर जाइए, वक्त की नजाकत है सुधर जाइए….
अगर प्यार होता लखन राम जैसा, तो रिश्ते नहीं तोड़ पाता ये पैसा….
आदि प्रमुख रचनाएं लोगों की जुबान पर तैरती दिखती है। उनका गजल संग्रह प्रेस में प्रकाशन हेतु पड़ा है। उनकी शव यात्रा पैतृक आवास कालीमहाल से उठकर मणिकर्णिका घाट तक पहुंची। घाट पर उनके इकलौते पुत्र विशाल शर्मा ने मुखाग्नि दी। जहां कवि, साहित्यकारों एवं समाजसेवियों का जमावड़ा लगा था।

लोगों ने अपने प्रिय कवि को श्रद्धांजलि अर्पित की। जिसमें मुख्य रूप से डॉक्टर जयशंकर जय, बुद्धदेव तिवारी, संतोष प्रित, गोपाल केसरी, कंचन सिंह परिहार, कुमार महेंद्र, कवि दिनेश दत्त, डॉ॰ अशोक अज्ञान, डॉ॰ सुभाष चंद्र, झरना मुखर्जी, क्षति द्विवेदी, दीपक शर्मा, मुन्ना पांडे आदि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

