बीएचयू में बड़े शैक्षणिक बदलाव की तैयारी, कई नए विभाग व सुपर स्पेशियलिटी को मिली मंजूरी
वाराणसी(जनवार्ता) । Banaras Hindu University (बीएचयू) में शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं को लेकर बड़े फैसले लिए गए हैं। गुरुवार को कुलपति अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में महामना सभागार में हुई विद्वत परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक का संचालन कुलसचिव अरुण कुमार सिंह ने किया।


बैठक में सबसे बड़ा फैसला चिकित्सा विज्ञान संस्थान में डिपार्टमेंट ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की स्थापना को लेकर लिया गया। इसके शुरू होने से गंभीर मरीजों के इलाज की व्यवस्था और मजबूत होगी तथा दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।

इसके साथ ही चिकित्सा विज्ञान संस्थान के विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों में डीएम, एमडी और एमसीएच जैसे उच्च चिकित्सा पाठ्यक्रम शुरू करने को भी हरी झंडी दे दी गई। परिषद ने विश्वविद्यालय स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इससे नई दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता का बेहतर परीक्षण किया जा सकेगा।
बैठक में आयुर्वेद संकाय में National Commission for Indian System of Medicine (एनसीआईएसएम) के मानकों के अनुसार पाठ्यक्रमों में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। साथ ही स्ट्रक्चर्ड इंटर्नशिप प्रोग्राम लागू करने पर भी सहमति बनी।
नई शिक्षा नीति के तहत कई नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने और पुराने पाठ्यक्रमों को संशोधित करने पर भी चर्चा हुई। विश्वविद्यालय से संबद्ध Arya Mahila P.G. College और Vasanta College for Women, राजघाट में बीए-बीएड इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई।
विद्वत परिषद ने छात्रों के लिए स्टूडेंट फीडबैक फॉर्म को अनिवार्य करने का भी निर्णय लिया। इसके अलावा कई नई फेलोशिप शुरू करने, पाठ्यक्रमों को और समृद्ध बनाने तथा चिकित्सा विज्ञान संस्थान में नए विभाग स्थापित करने के प्रस्तावों पर भी मुहर लगी।
बैठक में फुल टाइम पीएचडी स्कॉलर्स को पार्ट टाइम पीएचडी में बदलने से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही शैक्षणिक सत्र 2025–26 के लिए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित रिपोर्ट पर प्रस्तुति भी दी गई।
इन फैसलों को बीएचयू में शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।

