पीले राम नाम का प्याला | भक्ति रस में डूबने का सबसे पवित्र उपाय
“पीले राम नाम का प्याला” यह पंक्ति भक्ति की मधुरता और प्रभु के नाम के अमृत का प्रतीक है। जब जीवन की थकान, चिंता या दुख मन को भारी करते हैं, तब राम नाम का प्याला पीना आत्मा को शांति देता है। यह प्याला किसी पेय का नहीं, बल्कि प्रभु के नाम और विश्वास का है, जो मनुष्य को भीतर से सशक्त और शांत करता है। राम नाम का जप हर सांस में आनंद, भक्ति और आत्मिक प्रकाश भर देता है। जब यह भाव हृदय में उतर जाता है, तो जीवन स्वयं एक भजन बन जाता है।

पीलो राम नाम का प्याला—–
राम नाम का प्याला
पीके जिसको अमृत हो जाए
भरी घूंट जो हाला
पीलो राम नाम का प्याला—–
मन को अपने पावन करलो
हो जैसे कोई शिवाला
पीलो राम नाम का प्याला—–
तान ऐसी हरि नाम की छेड़ो
सुन हो जाए हर कोई मतवाला
पीलो राम नाम का प्याला—–
राजीव कहे करो उसकी चाकरी
दिया जीवन जिसने संभाला
पीलो राम नाम का प्याला—–
पीके जिसको अमृत हो जाए
भरी घूंट जो हाला
पीलो राम नाम का प्याला
राम नाम के जप और स्मरण की सरल विधि
- समय: प्रातःकाल या संध्या समय, जब मन शांत हो।
- स्थान: घर के पूजास्थल या किसी शांत कोने में बैठें।
- सामग्री: तुलसी की माला, दीपक, पुष्प और जल।
- पूजन क्रम:
- दीपक जलाकर भगवान श्रीराम की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।
- मन में श्रद्धा भाव से कहें — “हे प्रभु, मैं आपके नाम का प्याला पीने आया हूँ।”
- “श्रीराम जय राम जय जय राम” का जप कम से कम 108 बार करें।
- अंत में भगवान राम और माता सीता को प्रणाम करें तथा दीपक की आरती करें।
- भाव: पूजा करते समय मन को पूरी तरह प्रभु के नाम में लीन करें, मानो हर श्वास में राम का नाम बस गया हो।
राम नाम जप के अद्भुत फल
- मन में शांति और आनंद का अनुभव होता है।
- चिंता, भय और असुरक्षा की भावना समाप्त होती है।
- मन, वचन और कर्म में पवित्रता आती है।
- सफलता और संतोष दोनों एक साथ प्राप्त होते हैं।
- राम नाम से भक्ति, विश्वास और आत्मबल का विकास होता है, जिससे हर कठिनाई सरल लगती है।
निष्कर्ष
“पीले राम नाम का प्याला” यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि भक्ति का वह मंत्र है जो जीवन में अमृत घोल देता है। जब मनुष्य प्रभु श्रीराम के नाम में खो जाता है, तब उसके भीतर एक नई ऊर्जा और संतुलन जन्म लेता है। राम नाम ही वह प्याला है जो हृदय की सारी विषमताओं को हर लेता है और उसमें प्रेम, करुणा और संतोष भर देता है।

