बाबा ज्योत पे आजा | प्रेम और श्रद्धा से पुकारा गया ईश्वर का सजीव आमंत्रण
“बाबा ज्योत पे आजा” — यह पंक्ति भक्त के हृदय की गहराई से निकली विनती है। जब मन भक्ति से भर जाता है, तो वह अपने आराध्य को हर दीपक की लौ में देखने लगता है। यह पुकार दर्शाती है कि भक्त अपने बाबा को केवल मंदिर में नहीं, बल्कि हर प्रकाश, हर आशीर्वाद की किरण में अनुभव करना चाहता है। यह भाव हमें याद दिलाता है कि जब मन सच्चे प्रेम से पुकारता है, तो ईश्वर अवश्य उस ज्योति में प्रकट होते हैं और अपने भक्त को आशीर्वाद देते हैं।

बाबा ज्योत पे आजा हो मैं बहोत घनी दुःख पाई,
हो मैं बहोत घनी दुःख पाई,
तेरे नाम की बनी भगतनि दुनिया बोली मारे,
मेरे मर्ज का वैद मिला ना घूम ली सु सारे,
बाबा ज्योत पे आजा हो मैं बहोत घनी दुःख पाई….
अगड पड़ोसन बाँझ बतावे भाग लिखा लिया ओला,
एक लाल तू दे दे बाबा मिट जा सारा रोला,
बाबा ज्योत पे आजा हो मैं बहोत घनी दुःख पाई….
पति मेरा से सादा भोला होया औलाद का तोडा,
सास मेरी ने हाथ पकड़ लिया देवरानी ने सर फोड़ा,
बाबा ज्योत पे आजा हो मैं बहोत घनी दुःख पाई….
सारा कुजबा छो मैं आवे पाछे पड़ी देवरानी,
लुक लुक रोना पड़ गया होगयी मुश्किल रात बितानी,
बाबा ज्योत पे आजा हो मैं बहोत घनी दुःख पाई….
तू ना आया ते बाबा मैं तो जहर मंगा के पी लूं,
एक बेटे की भीख घाल दे मैं लाड लड़ा के जी लूं,
बाबा ज्योत पे आजा हो मैं बहोत घनी दुःख पाई….
इतना काम बना दे बाबा फेर भँवर पे आऊँ,
नरेश पुनिया न्यू कह से मैं कौशिक ने बुलाऊँ,
बाबा ज्योत पे आजा हो मैं बहोत घनी दुःख पाई….
विधि
- स्थान: घर या मंदिर में पवित्र स्थान चुनें और दीपक प्रज्वलित करें।
- तैयारी: ताज़े फूल, अगरबत्ती और प्रसाद रखें।
- प्रारंभ: तीन बार “ॐ नमः शिवाय” या “जय साईराम” (अपने आराध्य के अनुसार) का उच्चारण करें।
- भावना: दीपक की लौ को ध्यान से देखें और मन ही मन पुकारें — “बाबा ज्योत पे आजा, मेरे मन मंदिर में बस जा।”
- भजन/जप: इसी भाव से “बाबा ज्योत पे आजा” भजन का गान करें या श्रद्धा से जप करें।
- समापन: अंत में प्रणाम करें और धन्यवाद दें — “हे बाबा, मेरी आराधना स्वीकार करें।”
लाभ
- आंतरिक शांति: मन में सुकून और स्थिरता का अनुभव होता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: दीपक की लौ और जप से वातावरण पवित्र बनता है।
- भक्ति की गहराई: ईश्वर से जुड़ाव और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- संकटों का निवारण: बाबा की कृपा से भय और चिंता दूर होती है।
- मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से की गई प्रार्थना शीघ्र फल देती है।
निष्कर्ष
“बाबा ज्योत पे आजा” — यह पंक्ति भक्त और भगवान के बीच सजीव संवाद का प्रतीक है। यह याद दिलाती है कि जब हम दीपक की लौ में श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का प्रकाश जलाते हैं, तो बाबा स्वयं उस प्रकाश में उतर आते हैं। भक्त की यह पुकार केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ होती है जो सीधे ईश्वर के हृदय तक पहुँचती है।

