लाखों की लागत से बना आरआरसी केंद्र उपयोग के अभाव में निष्क्रिय, ग्राम सचिव पर गांव न आने का आरोप
चौबेपुर (जनवार्ता): सरकार की स्वच्छता योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने के दावे जोर-शोर से किए जा रहे हैं और संचारी रोग नियंत्रण अभियान भी चलाया जा रहा है, लेकिन हकीकत में कई योजनाएं धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। चोलापुर विकास खंड के ग्राम पंचायत गरथौली में लाखों रुपये की लागत से बना आरआरसी केंद्र इसका ताजा उदाहरण है।ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद से ही उपयोग के अभाव में यह केंद्र पूरी तरह निष्क्रिय पड़ा है। करीब कई वर्षों पहले बने इस केंद्र का उद्देश्य गांव में उत्पन्न कचरे का समुचित निस्तारण करना था। नतीजन, ग्रामीण आज भी गांव के भीतर ही सूखा और गीला कूड़ा फेंकने तथा आरआरसी केंद्र के आसपास कूड़ा डालने को मजबूर हैं, जिससे चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र केवल नाम के लिए बना है, इसका कोई वास्तविक लाभ गांव को नहीं मिल रहा। स्थानीय लोगों ने बताया कि केंद्र के आसपास भी गंदगी फैली हुई है और बड़ी-बड़ी घास उग आई है। ऐसे में लाखों की योजना सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है।वहीं गांव प्रशासक (पूर्व प्रधान) चंद्रमा मौर्या ने जनवार्ता प्रतिनिधि को बताया कि कूड़ा ढोने वाली गाड़ी महीनों से बिगड़ी हुई है तथा ग्राम सचिव संजय यादव गांव में आते ही नहीं हैं। लोगों को केंद्र पर कूड़ा फेंकने के लिए मना किया गया है।वहीं, जनवार्ता प्रतिनिधि से ग्राम सचिव संजय यादव ने बताया कि अभी कुछ महीनों पहले जेसीबी से सफाई कराई गई थी और उन्होंने ग्राम प्रशासक की बातों को नकारते हुए कहा कि वह गांव में जाते हैं।

