भक्ति और सुरों के संग संपन्न हुआ संकटमोचन संगीत समारोह
अंतिम दिन 1.15 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने बांधा समां
वाराणसी, (जनवार्ता)।संकटमोचन संगीत समारोह के अंतिम दिन शनिवार को भक्ति, संगीत और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अनुपम संगम देखने को मिला। अवकाश का दिन होने के कारण संकटमोचन हनुमान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों से खचाखच भरा रहा। मंदिर प्रशासन के अनुसार दिनभर में करीब 1 लाख 15 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया।


मंदिर परिसर में दर्शन के साथ कला दीर्घा और मंच पर आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को आध्यात्मिक और सुरमय बनाए रखा। अंतिम दिन की शुरुआत भुवनेश्वर से आए प्रख्यात ओडिसी कलाकार पं. रतिकांत महापात्र, सुजाता महापात्र और उनकी संस्था ‘सृजन’ की मनोहारी प्रस्तुति से हुई। ओडिसी की सधी मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इसके बाद दिल्ली के प्रसिद्ध सितार वादक मेहताब अली नियाज़ी और मुंबई के तबला वादक ईशान घोष ने जुगलबंदी प्रस्तुत कर समां बांध दिया। सितार की मधुर तानों और तबले की जटिल लयकारी के अद्भुत तालमेल ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। प्रस्तुति में राग की शुद्धता और लय का संतुलन शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

समारोह में आगे देवास की विख्यात शास्त्रीय गायिका विदुषी कलापिनी कोमकली ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से माहौल को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। उनके साथ तबले पर रामेंद्र सिंह सोलंकी, संवादिनी पर पं. धर्मनाथ मिश्र (लखनऊ) और सारंगी पर विनायक सहाय (जालंधर) ने उत्कृष्ट संगत दी। गायन में परंपरागत घराने की गहराई, भावों की सूक्ष्मता और सुरों की शुद्धता ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह के अंतिम दिन मंदिर में सजे राम दरबार और संगीत प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध विरासत से भी जोड़ दिया।

