यूजीसी के निर्देशों को लागू करने की मांग, छात्रों का मार्च
वाराणसी (जनवार्ता)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के समर्थन में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने मंगलवार को मार्च निकाला। जिसके कारण शैक्षणिक वातावरण में हलचल तेज हो गई। यह मार्च वीटी विश्वनाथ मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और महिला महाविद्यालय चौराहा तक मार्च निकाला गया। इस दौरान पुलिस प्रशासन और विश्वविद्यालय का प्राक्टोरियल बोर्ड पूरी तरह सतर्क रहा तथा स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी।


वही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों ने समानता और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते हुए मार्च किया। छात्रों ने पत्रक वितरित कर उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त संरचनात्मक जातिगत भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया। जहाँ पत्र में कहा गया कि दशकों से इन वर्गों के छात्र, शोधार्थी, शिक्षक और कर्मचारी प्रवेश, मूल्यांकन, शोध, शोधवृत्ति, छात्रावास, नियुक्ति और पदोन्नति जैसी प्रक्रियाओं में अपमान, बहिष्करण, सूक्ष्म भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।
छात्रों ने थोराट समिति रिपोर्ट (2007) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली अध्ययन (2019) का हवाला देते हुए कहा कि तथाकथित मेधा और आरक्षित वर्ग की आड़ में होने वाला सूक्ष्म भेदभाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई छोड़ने और आत्महत्या जैसी घटनाओं से जुड़ा रहा है।
यह मार्च अनुसूचित जाति,जनजाति,अन्य पिछड़ा वर्ग एकता मंच, बीएचयू ने विश्वविद्यालय से समान अवसर केंद्र और समानता समिति के तत्काल गठन, जानकारी सार्वजनिक करने तथा पारदर्शी रिपोर्ट समय पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजने की मांग की है। प्रशासन ने मार्च मार्ग को पूरी तरह छावनी में तब्दील किया। इस मार्च को लेकर एक पुलिस अधिकारी से मीडिया कर्मी ने वार्ता की तो उन्होंने भीड़ की संख्या को अत्यधिक कम बताते हुए चलते बने।

