विंध्यवासिनी धाम से काशी विश्वनाथ को लस्सी अर्पण की पावन परंपरा

विंध्यवासिनी धाम से काशी विश्वनाथ को लस्सी अर्पण की पावन परंपरा

वाराणसी (जनवार्ता)। श्री काशी विश्वनाथ धाम में रविवार को एक भावपूर्ण और सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत निर्वहन हुआ। विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी धाम से भगवान बाबा विश्वनाथ को ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में शीतलता प्रदान करने की भावना से विशेष लस्सी की पावन भेंट अर्पित की गई।

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यह आयोजन वसंत ऋतु के समापन और फाल्गुन मास के आरंभ के साथ काशी में गर्मी के प्रभाव की शुरुआत का प्रतीक है। विंध्यवासिनी धाम के भक्तों द्वारा लाई गई यह लस्सी भगवान को शीतलता देने के उद्देश्य से समर्पित की गई, जो सनातन परंपरा तथा काशी और विंध्याचल के बीच गहरे धार्मिक बंधन को दर्शाती है।

मंदिर के डिप्टी कलेक्टर शंभू शरण ने इस भेंट को पूर्ण सम्मानपूर्वक ग्रहण किया। उन्होंने स्वयं गर्भगृह में उपस्थित होकर बाबा विश्वनाथ को श्रद्धा से लस्सी अर्पित की। इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही, जिन्होंने इस क्षण का साक्षी बनकर अपनी आस्था व्यक्त की और हर-हर महादेव के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।

श्री काशी विश्वनाथ धाम प्रशासन ने बताया कि ऐसी परंपराओं का संरक्षण तथा श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था को और मजबूत करते हैं तथा भक्तों के समर्पण को उजागर करते हैं। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि इस प्रकार की भेंटें भगवान की कृपा आकर्षित करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।

विंध्यवासिनी धाम से लस्सी की यह भेंट काशी के धार्मिक जीवन में विशेष स्थान रखती है, जो उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख तीर्थस्थलों—विंध्याचल और काशी—के बीच प्राचीन भक्ति परंपरा को जीवंत बनाए रखती है। धाम प्रशासन ने भविष्य में भी ऐसी परंपराओं को जारी रखने तथा उन्हें और अधिक भव्य रूप देने का संकल्प दोहराया है, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाओं का पूर्ण सम्मान हो सके।

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Shiv murti

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