शहीद कैप्टन प्रशांत कुमार चौरसिया का बलिदान: एक वीर गाथा

शहीद कैप्टन प्रशांत कुमार चौरसिया का बलिदान: एक वीर गाथा

वाराणसी (जनवार्ता) । भारतीय सेना के युवा अधिकारी कैप्टन प्रशांत कुमार चौरसिया ने अपने साथी की जान बचाते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उत्तराखंड के देहरादून में 10वीं भैरव बटालियन के प्रशिक्षण अभ्यास के दौरान हुए दुखद हादसे में वे शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर सोमवार को सुबह वायुसेना के विशेष विमान से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचा, जहां सेना के जवानों ने उन्हें सशस्त्र सलामी दी।

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कैप्टन प्रशांत गाजीपुर जिले के जमानियां कस्बे, दुर्गा चौक निवासी पुरुषोत्तम कुमार चौरसिया के पुत्र थे। मात्र 25 वर्ष की उम्र में इस वीर सपूत ने 11 जून 2022 को भारतीय सेना में सेवा शुरू की थी। वे 140वीं एनडीए कोर्स के अधिकारी थे और फिलहाल देहरादून स्थित 10वीं भैरव बटालियन में तैनात थे।

20 मार्च 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे भैरव बटालियन के घातक प्लाटून प्रतियोगिता और आर्म्स एक्सरसाइज के दौरान नदी पार करने के अभ्यास में एक जवान तेज बहाव में फंस गया। कैप्टन प्रशांत ने बिना किसी हिचकिचाहट के नदी में छलांग लगाई और साथी जवान को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन खुद तेज धारा में बह गए और पानी के नीचे पत्थर से टकराकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत देहरादून के मिलिट्री अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दो दिन तक इलाज चला। दुर्भाग्यवश 22 मार्च की सुबह वे वीरगति को प्राप्त हो गए।

सोमवार सुबह बाबतपुर एयरपोर्ट के कार्गो परिसर पर शहीद के पार्थिव शरीर को 39 जीटीसी के अधिकारियों और जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सलामी दी। इस मौके पर 39 जीटीसी के एडीएम कमांडेंट कर्नल संदीप दवास, डिप्टी कमांडेंट कर्नल प्रदीप बेहरा, फूलपुर थाना प्रभारी अतुल सिंह, बाबतपुर चौकी इंचार्ज विजय कुशवाहा सहित सेना और पुलिस के कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। इसके बाद सेना के विशेष वाहन से उनका पार्थिव शरीर गृह जनपद गाजीपुर ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार होगा। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और लोग उनके बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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Shiv murti

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