इन आंकड़ों को देख क्‍यों खुश होंगे पीएम मोदी,कहां…

इन आंकड़ों को देख क्‍यों खुश होंगे पीएम मोदी,कहां…

नई दिल्‍ली। शहरों में बेरोजगारी दर घटकर 6.4% रह गई है। लगभग छह साल में यह सबसे कम है। ये आंकड़े जुलाई-सितंबर 2024 तिमाही के हैं। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बताया कि महिलाएं भी ज्यादा संख्या में काम पर जा रही हैं। बेरोजगारी दर घटी है। हर वर्ग की आमदनी में इजाफा हुआ है। ये आंकड़े मोदी सरकार को जरूर राहत देंगे। बीते कुछ समय में रोजगार के मुद्दे पर वह लगातार विपक्ष के निशाने पर रही है।

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यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई-सितंबर तिमाही में आमतौर पर कंपनियां नई भर्तियां करती हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बताया कि कंपनियों की ओर से नए लोगों को काम पर रखे जाने के कारण बेरोजगारी दर में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) के आंकड़े भी मांग में बढ़ोतरी का संकेत देते हैं। इस अवधि के दौरान पीएमआई 50 से ऊपर बना रहा। यह भर्ती में ग्रोथ की ओर इशारा करता है।

क्‍या कहते हैं सरकार के आंकड़े?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी जुलाई-सितंबर 2024 के लिए पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 50.4% के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। पुरुष और महिला बेरोजगारी दर जुलाई-सितंबर 2024 में घटकर 5.7% और 8.4% रह गई। यह आंकड़ा 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए है।

जम्मू और कश्मीर में सबसे ज्यादा 11.8% बेरोजगारी दर थी। इसके बाद ओडिशा (10.6%), बिहार (10.4%), केरल (10.1%), राजस्थान (8.9%) और हिमाचल प्रदेश (8.7%) का स्थान रहा। PLFS ने जुलाई-सितंबर राउंड के लिए 45,005 परिवारों और 170,598 लोगों का सर्वे किया।

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पुरुष LFPR 75% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि महिला LFPR 25.5% पर रहा। यह जनवरी-मार्च 2024 में दर्ज किए गए 25.6% से थोड़ा कम है। कुल मिलाकर, LFPR 2024-25 की पहली तिमाही में 50.1% और 2023-24 की दूसरी तिमाही में 49.3% था। लगभग आधे वर्कर्स रेगुलर वेज/सैलरीड इम्‍प्‍लॉयी थे। इसके बाद सेल्‍फ-इम्‍प्‍लॉयड (39.9%) और आकस्मिक श्रमिक (10.7%) थे।

आंकड़ों से पता चला है कि आधे से ज्यादा महिला कर्मचारी नियमित वेतन या वेतनभोगी कर्मचारी थीं। हालांकि, यह हिस्सेदारी पिछली तिमाही के 54% से थोड़ी कम हुई है। दूसरी ओर, पुरुषों में 47.9% नियमित वेतन या वेतनभोगी कर्मचारी थे। सबनवीस ने बताया कि महिलाओं की भागीदारी स्व-रोजगार के भीतर बढ़ी है। मुख्य रूप से घरेलू उद्यमों में सहायक के रूप में। यह दर्शाता है कि अधिक उद्यम सामने आ रहे हैं।

कहां कौन सा राज्‍य?
22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 13 में राष्ट्रीय औसत से अधिक LFPR था। इसमें हिमाचल प्रदेश 61.8% के साथ सबसे आगे था। इसके बाद गुजरात (53.9%), पश्चिम बंगाल (53.8%), तेलंगाना (53.5%), असम (53.2%) और महाराष्ट्र (52.8%) का स्थान रहा। युवाओं (15-29 वर्ष) का LFPR जुलाई-सितंबर में 41.6% था। इसमें पुरुषों के लिए 59.8% और महिलाओं के लिए 21.9% था। दूसरी ओर, युवा बेरोजगारी दर 15.9% थी। इसमें पुरुषों के लिए 14.2% और महिलाओं के लिए 21% थी।

स्नातकोत्तर डिग्री और उससे ऊपर की डिग्री वाली महिलाओं में कार्यबल भागीदारी 2017-18 में 34.5% से बढ़कर 2023-24 में 39.6% हो गई। इसके अलावा उच्चतर माध्यमिक शिक्षा प्राप्त 23.9% महिलाएं और प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त 50.2% महिलाएं कार्यबल का हिस्सा हैं।

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हालांकि, शिक्षा और घरेलू जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण फैक्‍टर हैं जो महिलाओं को वर्कफोर्स से बाहर रखते हैं। जहां 37.94% महिलाओं ने शिक्षा को अपना कारण बताया, जो उच्च योग्यता पर फोकस करने को दर्शाता है। वहीं, 43.04% ने बच्चों की देखभाल और गृहकार्य प्रतिबद्धताओं को बाधा बताया।

Shiv murti

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