यूपी में आईएएस अफसरों के दोबारा तबादले: 12 घंटे में जॉइनिंग के बाद ट्रांसफर, रद्दीकरण और विशेष सिफारिशों की चर्चा
लखनऊ (जनवार्ता): उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में आईएएस अफसरों के बड़े पैमाने पर तबादलों का दौर चलाया है, जिसमें कुछ मामलों में अभूतपूर्व मोड़ देखने को मिले। 28 अक्टूबर को जारी 46 आईएएस अधिकारियों के तबादले के आदेशों के बाद अब दोबारा फेरबदल की खबरें आ रही हैं। इनमें रामपुर और महाराजगंज जिलों के चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (सीडीओ) पदों पर नियुक्तियों में उलटफेर, 12 घंटे में ट्रांसफर और विशेष सिफारिशों का दबाव प्रमुख है। ब्यूरोक्रेसी में यह फैसला चर्चा का विषय बन गया है, जहां राज्य सिविल सर्विस (एससीएस) कार्डर के अफसरों को फायदा हुआ, जबकि रेगुलर रिक्रूटमेंट (आरआर) कार्डर के अफसर सिफारिशों के बावजूद नाकाम रहे। आने वाले दिनों में आईएएस और पीसीएस अफसरों के छोटे-मोटे तबादले जारी रहने की संभावना है।

रामपुर सीडीओ का मामला: 12 घंटे में जॉइनिंग के बाद तबादला
28 अक्टूबर को जारी आदेशों के तहत आईएएस महेंद्र कुमार सिंह को रामपुर का सीडीओ बनाया गया था। उन्होंने पदभार ग्रहण भी कर लिया, लेकिन मात्र 12 घंटे बाद ही उनका ट्रांसफर महाराजगंज सीडीओ के पद पर कर दिया गया। यह कदम प्रशासनिक दबाव और विशेष सिफारिशों का नतीजा माना जा रहा है। रामपुर में अब आईएएस गुलाब चंद को नया सीडीओ नियुक्त किया गया है। गुलाब चंद का महाराजगंज सीडीओ का पुराना तबादला रद्द कर रामपुर भेजा गया, जबकि डॉ. महेंद्र कुमार सिंह को महाराजगंज की जिम्मेदारी सौंपी गई।
यह घटना यूपी ब्यूरोक्रेसी में हलचल मचा रही है, क्योंकि इतने कम समय में ट्रांसफर दुर्लभ है। सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक दबाव और स्थानीय नेताओं की सिफारिशें इसमें अहम रहीं।
एम. देवराम की प्रमुख सचिव नियुक्ति: 24 घंटे में पलटा आदेश
नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराम (1996 बैच) की नियुक्ति को भी मात्र 24 घंटे में उलट दिया गया। 28 अक्टूबर के बड़े तबादले में उन्हें प्रमुख सचिव के पद पर रखा गया था, लेकिन विशेष सिफारिशों और दबाव के बाद नया आदेश जारी कर उन्हें जीएसटी विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई। यह बदलाव विभागीय समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन ब्यूरोक्रेटिक हलकों में इसे ‘म्यूजिकल चेयर्स’ करार दिया जा रहा है।
ब्यूरोक्रेसी में चर्चा: एससीएस vs आरआर कार्डर का खेल
इस पूरे प्रकरण ने यूपी की नौकरशाही में बहस छेड़ दी है। एससीएस कार्डर (प्रमोटी आईएएस) के अफसरों ने अपने ‘सर’ (वरिष्ठों) की मदद से ट्रांसफर रद्द करवाने और डायवर्ट करवाने में सफलता पाई, जबकि आरआर कार्डर (डायरेक्ट रिक्रूट) के अफसर अपनी ब्यूरोक्रेट पत्नी के जिले के पास पोस्टिंग के लिए सिफारिशें करने के बावजूद नाकाम रहे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह सिस्टम का पुराना खेल है, जहां कनेक्शन और दबाव काम करते हैं।”
हाल के दिनों में यूपी सरकार ने 46 आईएएस और 27 पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिसमें 10 जिलाधिकारियों (डीएम) के पद भी शामिल हैं। रामपुर में अजय कुमार द्विवेदी नए डीएम बने, जबकि श्रावस्ती, बलरामपुर, कौशांबी जैसे जिलों में भी फेरबदल हुआ। ये तबादले प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और विकास योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से किए गए हैं।
आने वाले तबादलों की भविष्यवाणी
सूत्र बताते हैं कि नवंबर-दिसंबर में आईएएस और पीसीएस के छोटे-छोटे तबादले होते रहेंगे, खासकर आगामी चुनावी तैयारियों और विभागीय समीक्षाओं के मद्देनजर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ब्यूरोक्रेसी को ‘परफॉर्मेंस बेस्ड’ बनाने पर जोर दे रही है, लेकिन विशेष सिफारिशें अभी भी प्रभावी बनी हुई हैं।

