एनएसयूआई का ‘मनरेगा बचाओ’ मार्च: पुलिस से हिंसक झड़प, 100 से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में
वाराणसी (जनवार्ता): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में रविवार को कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने केंद्र सरकार के नए बिजी जी, राम जी बिल के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह बिल महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूरी तरह प्रतिस्थापित करने जा रहा है। कांग्रेस इसे ‘ग्रामीण रोजगार के अधिकार पर हमला’ बता रही है और इसी के विरोध में देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चला रही है।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सिंह द्वार पर जमा हुए। हाथों में महात्मा गांधी के पोस्टर और प्लेकार्ड लिए वे नारे लगाते हुए प्रधानमंत्री के जनसंपर्क कार्यालय की ओर मार्च निकालने की कोशिश में थे।
पुलिस ने पहले से ही तीन स्तर की बैरिकेडिंग, रस्सियां और भारी फोर्स के साथ रास्ता रोक रखा था। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड फांदने की कोशिश की तो स्थिति एकदम भड़क उठी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तेज गुत्थम-गुत्थी हुई। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को जमीन पर घसीटते हुए पुलिस वाहनों में भरकर हिरासत में ले लिया।
इस दौरान एनएसयूआई राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी को भी पुलिस ने कंधे से पकड़कर जोरदार धक्का दिया, जिससे वे सड़क पर गिर पड़े। घटना की तीव्रता को दर्शाने वाले कुछ दृश्य इस प्रकार हैं:
पुलिस ने करीब 10 वाहनों में 100 से अधिक कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। तनाव बढ़ने पर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल खुद घटनास्थल पर पहुंचे और बल प्रयोग के सख्त निर्देश दिए।
प्रशासन पहले से ही हाई अलर्ट पर था। पूरे शहर में लगभग 1000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। सिंह द्वार पर 500 से ज्यादा जवान, ड्रोन निगरानी और प्रधानमंत्री कार्यालय के आसपास आरपीएफ की अतिरिक्त फोर्स पहले से मुस्तैद थी।
यह प्रदर्शन कांग्रेस के 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है, जो दिसंबर 2025 में संसद से पारित VB-G RAM G बिल के खिलाफ चल रहा है। कांग्रेस का कहना है कि नया बिल महात्मा गांधी के नाम को हटाकर ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकार को कमजोर कर रहा है, जबकि सरकार इसे ‘आधुनिक, पारदर्शी और अधिक प्रभावी’ रोजगार योजना बता रही है।
वाराणसी में इस तरह की घटनाएं राजनीतिक संवेदनशीलता को रेखांकित करती हैं, जहां पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था में जरा भी ढील नहीं बरती जाती। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार विरोध शांतिपूर्ण शुरू हुआ था, लेकिन बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की।

