एसआईआर से मतदाता सूची होगी शुद्ध
विचार गोष्ठी में उठे मुद्दे
वाराणसी (जनवार्ता) । मतदाता सूची को शुद्ध बनाने के लिए चल रहे विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के बीच शुक्रवार को होटल क्लार्क में एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में सांविधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय शाखा, विधान परिषद लखनऊ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय एसआईआर की वैधानिक उपादेयता पर विचार-विमर्श रहा।

वक्ताओं ने एसआईआर को मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। इससे फर्जी नाम हटेंगे और घुसपैठिए यानी अवैध प्रवासी मतदाता सूची से बाहर होंगे, जिससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। संसदीय अध्ययन संस्थान से जुड़े वेदव्यास ने कहा कि मतदाता सूची को ठीक करना सराहनीय है, लेकिन वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम न होने पर नोटिस जारी करना और तमाम साक्ष्य मांगना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इससे पहले की सूचियां फर्जी थीं।
मंजू यादव और प्रो. आद्या प्रसाद पाण्डेय ने एसआईआर को पूरी तरह उचित और जरूरी ठहराया। सीपी राय ने एसआईआर की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक आरटीआई में चुनाव आयोग ने खुद स्वीकार किया है कि एसआईआर को लेकर कोई आधिकारिक पत्रावली नहीं है। विधान परिषद के सचिव डॉ. राजेश सिंह ने जोर देकर कहा कि एसआईआर देश के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित होगी।
यह गोष्ठी ऐसे समय में हुई है जब वाराणसी में एसआईआर के तहत पहले ही 5.73 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं, जिनमें अनुपस्थित, शिफ्टेड और मृतक मतदाता शामिल हैं। प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और वक्ताओं की राय से स्पष्ट है कि एसआईआर पर मतभेद हैं, लेकिन अधिकांश इसे लोकतंत्र को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं।

