वाराणसी : ईरान-इजरायल युद्ध के असर से होटल-रेस्टोरेंट घरेलू सिलेंडरों पर मजबूर
कालाबाजारी बढ़ी
वाराणसी (जनवार्ता): ईरान-इजरायल (अमेरिका समर्थित) युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऊर्जा शिपमेंट बाधित होने से वैश्विक एलपीजी सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है। भारत में करीब 60% एलपीजी आयात होता है, जिसमें से 90% हिस्सा इसी मार्ग से आता है। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति पर प्रभावी रोक लगा दी है, जिससे वाराणसी सहित पूरे उत्तर प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य व्यवसाय संकट में फंस गए हैं।

शहर के करीब 60% इलाकों में स्थित होटल और रेस्टोरेंट अब घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किलो) का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की आधिकारिक डिलीवरी लगभग बंद है। मिंट हाउस, कैंट रेलवे स्टेशन, चौकाघाट, बेनियाबाग, दशाश्वमेध घाट और आसपास के इलाकों में दुकानदार और फूड आउटलेट घरेलू सिलेंडरों पर निर्भर हो गए हैं। कई जगहों पर कोयला, लकड़ी की अंगीठी या इंडक्शन/माइक्रोवेव जैसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं, जिससे खाना पकाने में समय और लागत बढ़ रही है, साथ ही पर्यावरण व स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ा है।
पर्यटन और तीर्थ नगरी होने के कारण वाराणसी में यह समस्या और गंभीर है। कई होटल-रेस्टोरेंट नियमों का उल्लंघन करते हुए घरेलू सिलेंडर इस्तेमाल कर रहे हैं। घरेलू गैस की कालाबाजारी भी चरम पर पहुंच गई है । सामान्य मूल्य से कहीं ज्यादा दामों पर ब्लैक में बिक्री हो रही है, जिससे आम लोग परेशान हैं।
जिला आपूर्ति अधिकारी से संपर्क के कई प्रयास विफल रहे, उनका फोन नहीं उठा। इससे विभागीय निगरानी की कमी और संभावित संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत नजर नहीं आ रही।
कई रिपोर्ट्स के अनुसार, वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रसाद निर्माण तक प्रभावित हुआ है। होटल एसोसिएशन और कारोबारी मांग कर रहे हैं कि कमर्शियल सप्लाई जल्द बहाल हो, पीएनजी कनेक्शन तेजी से दिए जाएं और ब्लैक मार्केटिंग पर तत्काल कार्रवाई हो। केंद्र ने रिफाइनरियों को घरेलू उत्पादन 25% बढ़ाने का निर्देश दिया है, लेकिन कमर्शियल सेक्टर को तत्काल राहत की जरूरत है।
शहरवासी और कारोबारियों की मांग है कि प्रशासन पारदर्शी तरीके से स्थिति संभाले, अफवाहों पर लगाम लगाए और सभी पक्षों को राहत पहुंचाए, ताकि तीर्थाटन और रोजगार प्रभावित न हो।

