काशी विश्वनाथ धाम से मां श्रृंगार गौरी और माता विशालाक्षी के दरबार में भेजी गई श्रृंगार सामग्री
वाराणसी (जनवार्ता)। पवित्र काशी में वासंतिक चैत्र नवरात्र के चौथे दिन रविवार को मां श्रृंगार गौरी को समर्पित रहा। श्री काशी विश्वनाथ धाम से परंपरानुसार मां श्रृंगार गौरी तथा मीरघाट स्थित शक्तिपीठ माता विशालाक्षी के दरबार में वस्त्र एवं श्रृंगार सामग्री भेजी गई।

यह प्राचीन परंपरा काशी की धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, सामग्री को सबसे पहले श्री काशी विश्वनाथ (श्री विश्वेश्वर) के पावन ज्योतिर्लिंग के समक्ष मंदिर के आचार्यों और शास्त्रियों की देखरेख में मंत्रोच्चार के साथ अवलोकित कराया गया। इसके बाद विधिपूर्वक इसे उपहार स्वरूप मां श्रृंगार गौरी और माता विशालाक्षी को अर्पित किया गया।
चैत्र नवरात्र 19 मार्च से 27 मार्च तक के दौरान प्रतिदिन मां गौरी के विभिन्न स्वरूपों (जैसे मुखनिर्मालिका गौरी, सौभाग्य गौरी, श्रृंगार गौरी आदि) के लिए समर्पित दिनों में इसी क्रम में वस्त्र और श्रृंगार सामग्री श्री विश्वेश्वर से अवलोकित करवा कर संबंधित मंदिरों में प्रेषित की जा रही है। यह भक्ति और परंपरा का सुंदर संगम दर्शाता है।
उधर, ज्ञानवापी क्षेत्र में स्थित मां श्रृंगार गौरी के दर्शन स्थल पर चौथे दिन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रही। हजारों श्रद्धालु शांतिपूर्ण ढंग से दर्शन-पूजन कर मां के आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। सभी ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ विग्रह स्थल पर प्रवेश किया। मंदिर प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं के कारण किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
यह परंपरा काशी की आध्यात्मिक महत्ता को और अधिक उजागर करती है, जहां भगवान विश्वनाथ और मां गौरी-विशालाक्षी के बीच का यह दिव्य संबंध सदियों से चला आ रहा है। भक्तों का मानना है कि ऐसे अनुष्ठान से मां की कृपा प्राप्त होती है और काशी की पावनता बनी रहती है।

