रिकॉर्ड समय में तैयार गंगा एक्सप्रेसवे, 12 जिलों को सीधी कनेक्टिविटी; यूपी को मिलेगी नई रफ्तार
29 अप्रैल को प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन, मेरठ से प्रयागराज का सफर होगा आधा |
उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मेरठ-प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे अब उद्घाटन के लिए पूरी तरह तैयार है। करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरदोई में राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। इस अवसर पर मेरठ और प्रयागराज सहित आठ जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी। इसके बाद 18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर में इसकी आधारशिला रखी गई। निर्माण कार्य को तेज गति से आगे बढ़ाते हुए इसे रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया है।
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने से प्रदेश के 12 जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। मेरठ से प्रयागराज तक जाने वाला यह मार्ग हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों को जोड़ते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच मजबूत संपर्क स्थापित करेगा।
इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से यात्रा समय में भी बड़ी कमी आएगी। मेरठ से प्रयागराज की दूरी, जो पहले 12 से 14 घंटे में पूरी होती थी, अब घटकर लगभग 6 से 7 घंटे रह जाएगी। इससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बढ़ने की संभावना है।
करीब 37 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना को चार पैकेज में विभाजित कर समानांतर रूप से निर्माण कराया गया। इस मॉडल के चलते कार्य तेजी से पूरा हो सका। परियोजना की निगरानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा की गई, जिसने निर्माण और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया।
उद्घाटन समारोह को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। एक्सप्रेसवे के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर पुलिस बल तैनात रहेगा, जबकि उद्घाटन से पहले तीन दिन तक आम वाहनों की आवाजाही पर रोक रहेगी।
गंगा एक्सप्रेसवे की एक विशेषता इसकी लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी भी है, जिसे भारतीय वायुसेना के उपयोग के लिए तैयार किया गया है। इस पट्टी पर आधुनिक लड़ाकू विमान टेकऑफ और लैंडिंग कर सकेंगे, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत भी बढ़ जाती है।
करीब दो दशक पहले कल्पना की गई इस परियोजना को कई कारणों से लंबे समय तक गति नहीं मिल सकी थी, लेकिन 2019 में इसे फिर से शुरू किया गया और अब यह वास्तविकता का रूप ले चुकी है।
गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई धुरी के रूप में उभरने जा रहा है, जो राज्य को तेज रफ्तार विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

