मिर्जापुर : अस्पताल चौकी में घुसकर पुलिसवालों की बेरहमी से पिटाई, वर्दी फाड़ी
बिल्ला नोचा, पिस्टल लहराकर दी हाईकोर्ट वकील की धमकी
मिर्जापुर (जनवार्ता) : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए एक घटना सामने आई है। शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के जिला अस्पताल स्थित पुलिस चौकी में देर रात दर्जनों दबंगों ने घुसकर चौकी प्रभारी और सिपाहियों की जमकर पिटाई कर दी। हमलावरों ने पुलिस की वर्दी फाड़ी, बिल्ला नोचा, वायरलेस सेट के तार तोड़ दिए और मोबाइल छीन लिए। एक हमलावर ने पिस्टल लहराते हुए खुलेआम धमकी दी- “हाईकोर्ट वकील है हम, मर्डर कर देंगे… फायर कर देंगे, सब खत्म हो जाएंगे।”

घटना की शुरुआत एक मामूली सड़क दुर्घटना से हुई। अस्पताल के पास ई-रिक्शा और ट्रैक्टर की टक्कर हो गई। इसके बाद ई-रिक्शा चालक से विवाद शुरू हो गया। पुलिस ने स्थिति संभालते हुए ई-रिक्शा चालक को चौकी पर ले आई और दूसरे पक्ष को भी बुलाया। लेकिन विवादित पक्ष ने अपने परिचितों और गांव वालों को फोन कर बुला लिया। मेउली गांव के रहने वाले इन लोगों की संख्या 50 के करीब बताई जा रही है।
चौकी में घुसते ही उपद्रवियों ने अफरातफरी मचा दी। उन्होंने चौकी प्रभारी मनोज राय और सिपाही कमलेश पासवान समेत अन्य पुलिसकर्मियों की बेरहमी से पिटाई की। आधे घंटे तक हंगामा जारी रहा। पुलिसकर्मी मदद के लिए चिल्ला भी नहीं पाए क्योंकि हमलावरों ने वायरलेस सेट के तार तोड़ दिए थे।
चौकी प्रभारी मनोज राय ने बताया, “चौकी में घुसकर दबंगों ने तोड़फोड़ मचा दी। वर्दी फाड़ी, बिल्ला नोचा। एक व्यक्ति ने पिस्टल निकालकर लहराया और कहा कि ‘हाईकोर्ट वकील है हम, मर्डर कर देंगे, कहां फायर करेंगे, सब लोग खत्म हो जाएंगे’।”
घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और हंगामा शांत हुआ। पुलिस ने चौकी प्रभारी की तहरीर पर चार नामजद आरोपियों भरत, मनोज, विकास, हरेंद्र प्रताप समेत एक दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, बाकी की तलाश जारी है।
अपर पुलिस अधीक्षक नितेश सिंह ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की गई है और सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें पुलिस पर हमले के दृश्य साफ दिख रहे हैं। स्थानीय लोगों में पुलिस की छवि और कानून व्यवस्था को लेकर आक्रोश है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने का दावा किया है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे “यूपी में बढ़ती दबंगई और पुलिस की बेकार होने” की मिसाल बताया है।
पुलिस आगे की जांच में जुट गई है।

