बिहार के गया में ‘ट्रायंगल लव’ का खूनी अंजाम: एक थाना ड्राइवर ने दूसरे को मारी गोली
गया। इश्क की आग ने एक बार फिर वर्दी की दुनिया को झुलसा दिया। बिहार के गया जिले में एक महिला सिपाही के प्रेम को लेकर दो थानों के ड्राइवर आमने-सामने आ गए। कहासुनी इतनी बढ़ी कि आखिरकार गोली चल गई। एक ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि दूसरे को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, परैया थाना के ड्राइवर *गौतम कुमार* ने कोतवाली थाना के ड्राइवर *नीरज कुमार* को गोली मार दी। दोनों ही महिला सिपाही के इश्क में दीवाने थे। लंबे समय से दोनों के बीच इस मुद्दे को लेकर तनाव चल रहा था, जो बुधवार को हिंसक रूप ले लिया।
घटना की तीखी बारीकियां
घटना परैया थाना क्षेत्र में हुई। जानकारी के मुताबिक, दोनों ड्राइवरों के बीच महिला सिपाही को लेकर पहले भी कई बार बहस हो चुकी थी। बुधवार को दोनों आमने-सामने हुए और बात हाथापाई तक पहुंच गई। गौतम कुमार ने गुस्से में आकर नीरज कुमार पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से नीरज कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी गौतम कुमार को मौके से गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से हथियार भी बरामद किया गया है।
गया के एसपी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा, “महिला सिपाही और दोनों ड्राइवरों के बीच प्रेम संबंध को लेकर विवाद था। हम पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं। आरोपी के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है।”
वर्दी में इश्क की कहानी
यह घटना पुलिस महकमे के अंदर चल रहे व्यक्तिगत संबंधों और अनुशासन के सवाल को एक बार फिर उठा रही है। गया जिले में पहले भी ऐसी कुछ घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें वर्दीधारी कर्मियों के बीच प्रेम triangle को लेकर तनाव देखा गया है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है। कई लोग पूछ रहे हैं कि थाना परिसर और पुलिस कर्मियों के बीच ऐसे संबंधों पर महकमा कितना नियंत्रण रखता है।
अभी तक की जांच मेंपता चला है कि महिला सिपाही दोनों ड्राइवरों से परिचित थीं, लेकिन उन्होंने किसी एक को स्पष्ट रूप से अपनी पसंद नहीं बताया था, जिसकी वजह से ईर्ष्या बढ़ती गई और आखिरकार खूनी परिणाम निकला।
मामले की जांच जारी है। पुलिस महिला सिपाही से भी पूछताछ कर रही है।
इश्क, ईर्ष्या और गोली…
जब वर्दी वाले ही वर्दी वालों पर गोली चलाने लगें, तो सवाल जरूर उठता है—क्या पुलिस लाइन में ‘ड्राइव’ अब ब्रेक से ज्यादा ‘ट्रिगर’ पर निर्भर हो गई है?

