वाराणसी में फर्जी दस्तावेजों से जमानत घोटाले का पर्दाफाश
साइबर पुलिस ने दो शातिरों को किया गिरफ्तार, फर्जी आधार-पैन और थाना मुहर बरामद
वाराणसी (जनवार्ता) । कमिश्नरेट की साइबर थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपराधियों की जमानत कराने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। शनिवार को पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पैसे लेकर गिरफ्तार अपराधियों के लिए जमानतदार उपलब्ध कराते थे और इसके लिए आधार व पैन कार्ड में नाम-पता बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य विभिन्न थानों में बंद अपराधियों से संपर्क स्थापित कर पैसे के बदले जमानत कराने का ठेका लेते थे। इसके बाद वे अपने सहयोगियों के आधार और पैन कार्ड में कूटरचना कर नाम व पता बदल देते थे। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों पर बेल बांड तैयार कर अदालत में पेश किए जाते थे। गिरोह ने विभिन्न पुलिस थानों की फर्जी मुहरें भी बनवा रखी थीं, जिनकी मदद से फर्जी थाना सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर स्पीड पोस्ट से न्यायालय भेजी जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों में
बलराम दास (76 वर्ष), निवासी चमांव, थाना शिवपुर और जनार्दन सिंह (56 वर्ष), निवासी अहिरान, थाना शिवपुर शामिल है ।
पुलिस ने इनके कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पैन कार्ड, थाना सत्यापन रिपोर्ट और नकदी बरामद की है।
सूचना मिलते ही पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और पुलिस उपायुक्त (अपराध) नीतू कादयान के निर्देश पर सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर अपराध) विदुष सक्सेना के नेतृत्व में टीम गठित की गई। टीम ने कचहरी क्षेत्र में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहें तथा ऐसी कोई जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
पुलिस इस पूरे गिरोह को पकड़ने के लिए तेजी से छापेमारी और जांच जारी रखे हुए है।

