प्राइवेट वार्ड में बंद पड़े AC, गर्मी से बेहाल मरीज
वाराणसी (जनवार्ता)। भीषण गर्मी के बीच पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के प्राइवेट वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई वार्डों में लगे एयर कंडीशनर (AC) बंद पड़े हैं, जिससे मरीज उमस और गर्मी में बेहाल हैं। तीमारदारों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन वातानुकूलित वार्ड के नाम पर शुल्क तो वसूल रहा है, लेकिन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं।


अस्पताल में संचालित करीब 10 प्राइवेट वार्डों में मरीजों से प्रतिदिन 400 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। इसके बावजूद अधिकांश कमरों में AC सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं। शिकायत करने पर भी जिम्मेदार अधिकारी और नर्सिंग स्टाफ केवल आश्वासन देकर मामले को टाल रहे हैं।
शिवपुर-तरना निवासी डॉ. मुकेश सिंह ने बताया कि वह अपनी मरीज मधु सिंह को लेकर करीब 15 दिनों से वार्ड नंबर-12 में भर्ती हैं। भर्ती के समय उन्हें बताया गया था कि वार्ड में AC की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन अब तक एक दिन भी AC नहीं चली। उन्होंने कहा कि मरीज गर्मी से परेशान है और कई बार शिकायत के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ।
इसी तरह आजमगढ़ निवासी तेज बहादुर सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने मरीज को सामान्य वार्ड से प्राइवेट वार्ड में इस उम्मीद से शिफ्ट कराया था कि वहां AC सुविधा मिलेगी। इसके लिए करीब 2000 रुपये जमा किए गए, लेकिन वार्ड में AC बंद मिली। सारनाथ निवासी मीरा देवी के तीमारदारों ने भी यही आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
तीमारदारों के अनुसार, प्राइवेट वार्डों में लगे AC का रिमोट मरीजों या उनके परिजनों को नहीं दिया जाता। रिमोट ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ के पास रहता है। जब भी AC चलाने के लिए कहा जाता है तो बताया जाता है कि मशीन खराब है और जल्द ठीक करा दी जाएगी। मरीजों के परिजनों का कहना है कि अधिकांश मरीज कुछ दिनों में डिस्चार्ज हो जाते हैं, ऐसे में शिकायतें सिर्फ आश्वासन तक सीमित रह जाती हैं।
मामले में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. आर.एस. राम ने कहा कि कुछ वार्डों में चूहों द्वारा वायरिंग काट दिए जाने से AC खराब हो गई हैं। उन्होंने बताया कि मशीनों को ठीक कराने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी। हालांकि तीमारदारों का सवाल है कि जब अस्पताल प्रशासन को समस्या की जानकारी है तो फिर मरीजों से वातानुकूलित वार्ड के नाम पर शुल्क क्यों लिया जा रहा है।

