दालमंडी बनेगी स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक मार्केट, चौड़ीकरण के साथ मस्जिदों के पुनर्विकास की भी तैयारी
वाराणसी, (जनवार्ता)। शहर की बहुचर्चित दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। प्रशासन ने मई माह तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी करने का लक्ष्य तय किया है। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा, जिसमें आधुनिक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, स्मार्ट रोड और इलेक्ट्रॉनिक कारोबार के नए केंद्र को विकसित किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दालमंडी में बनने वाला पहला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स इलेक्ट्रॉनिक और ई-कॉमर्स कारोबार का प्रमुख हब होगा।

करीब 650 मीटर लंबी दालमंडी गली को चौड़ा कर 17.4 मीटर किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंचने में आसानी हो सके। लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से परियोजना का 3डी मॉडल और वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें भविष्य की स्मार्ट दालमंडी की तस्वीर सामने आई है।
दालमंडी क्षेत्र में जिन भवनों का अधिग्रहण किया गया है, उनमें से एक स्थान पर तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि इसमें 10 से 12 दुकानें बनाई जाएंगी और इलेक्ट्रॉनिक सामान व ई-कॉमर्स कारोबार से जुड़े व्यापारियों को प्राथमिकता दी जाएगी। चौड़ीकरण में प्रभावित दुकानदारों को भी यहां स्थान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। परियोजना के तहत दावर खान ने अपने भवन की रजिस्ट्री चौड़ीकरण के लिए कराई थी, जिसके बाद इस हिस्से के विकास की प्रक्रिया तेज हुई है।
दालमंडी परियोजना के बाद इलाके की जमीन और व्यापारिक संपत्तियों की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है। वर्तमान में यहां का सर्किल रेट 44 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जबकि प्रभावित लोगों को 88 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया गया है। प्रशासन अब तक लगभग 40 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित कर चुका है।
PWD के अधिशासी अभियंता के.के. सिंह के अनुसार पूरी सड़क को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत पूरे 650 मीटर क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। चौड़ी सड़क, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और निगरानी प्रणाली के साथ दालमंडी को भविष्य की “स्मार्ट रोड” के रूप में विकसित किया जाएगा।
परियोजना के दायरे में आने वाली आधा दर्जन मस्जिदों को लेकर भी प्रशासन ने पुनर्विकास की योजना तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार मस्जिदों के मुतवल्लियों और प्रबंधन समितियों से लगातार बातचीत की जा रही है। PWD अधिकारियों ने बताया कि यदि वक्फ बोर्ड को समान क्षेत्रफल की जमीन उपलब्ध कराई जाती है, तो सरकार वहां नई मस्जिद निर्माण की लागत वहन करेगी। वहीं यदि उपयुक्त सरकारी भूमि चिन्हित होती है, तो उसी क्षेत्रफल में नई मस्जिद निर्माण का विकल्प भी दिया जाएगा।
करीब 220 करोड़ रुपये की इस परियोजना में अब तक सौ से अधिक भवनों का ध्वस्तीकरण पूरा हो चुका है। प्रशासन ने 31 अगस्त तक पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।

