पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के वेतन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई

पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों के वेतन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई

नई दिल्ली (जनवार्ता)। Supreme Court of India सोमवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें राज्य नियंत्रित मंदिरों के पुजारियों, सेवकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन एवं भत्तों की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है।

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न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। जनहित याचिका अधिवक्ता Ashwini Upadhyay द्वारा दायर की गई है।


याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि मंदिरों में कार्यरत पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन, भत्तों तथा सेवा सुविधाओं की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति या न्यायिक आयोग का गठन किया जाए। साथ ही, पुजारियों और मंदिर कर्मचारियों को वेतन संहिता 2019 की धारा 2(क) के तहत “कर्मचारी” का दर्जा देने की भी मांग उठाई गई है।


याचिकाकर्ता का कहना है कि जब राज्य सरकारें मंदिरों के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन को नियंत्रित करती हैं, तो पुजारियों और कर्मचारियों के साथ नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित होता है। ऐसे में उन्हें सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है।


याचिका में दावा किया गया है कि कई मंदिरों में पुजारी केवल श्रद्धालुओं की दक्षिणा पर निर्भर हैं और उन्हें न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल पा रहा। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हाल के वर्षों में पुजारियों द्वारा वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किए गए थे।


अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में उल्लेख किया है कि अप्रैल 2024 में Kashi Vishwanath Temple में रुद्राभिषेक के दौरान उन्हें मंदिर कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति की जानकारी मिली, जिसके बाद यह याचिका दायर की गई।

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याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से पुजारियों एवं मंदिर कर्मचारियों के कल्याण के लिए ठोस नीति बनाने की भी मांग की गई है।

Shiv murti

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